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Big Breaking : वाघा बॉर्डर पहुंचे वीर विंग कमांडर अभिनंदन, पहली झलक पाने के लिए उमड़ा जनसैलाब

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अभिनंदन वाघा बॉर्डर

वाघा बॉर्डर से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत के वीर विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान वाघा बॉर्डर पहुंच चुके हैं। उनका भव्य स्वागत किया जा रहा है। इस समय वाघा बॉर्डर का दृश्य देखने लायक है।
अभिनंदन वाघा बॉर्डर

अभिनंदन को लाने के लिए भारतीय सेना की 4 गाड़ियां बाघा बार्डर पहुंची। विंग कमांडर अभिनंदन को एयरफोर्स के सीनियर अधिकारी एयर वाइस मार्शल आर जी के कपूर ने बॉर्डर पर रिसीव किया। पाकिस्तान के अधिकारियों ने अभिनंदन को वापस छोड़ दिया है।

इस वीडियों को देखें- 10 बजे आने वाले Abhinandan Varthaman की वापसी पर फंसा पेंच! |Wing Commander| Wagha Border

बता दें अभिनंदन 48 घंटे बाद अपने वतन वापस लौटे हैं। उन्होंने पाकिस्तान में जिस तरह का हौंसला दिखाया है उससे देश को उन पर गर्व है। उनके माता-पिता से लेकर सभी देशवासियों को उन पर फक्र हो रहा है।अभिनंदन वाघा बॉर्डर

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इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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