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भारत की ‘Sabjikal Strike’ से बिलबिलाया पाकिस्तानी मीडिया, Atom बम गिराने की दी गीदड़ भभकी

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पुलवामा हमले के बाद भारत में पाकिस्तान के खिलाफ पूरे भारत में आक्रोश है। हर किसी की मांग है कि पाकिस्तान को हर तरफ से बायकाट किया जाये। जिसके चलते भारतीय किसानों ने सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। मध्य प्रदेश के किसानों ने पकिस्तान कोप टमाटर सप्लाई करने से इंकार कर दिया है, उनका कहना है वो कम पैसों में ज़िंदगी बसर कर लेंगे पर अपने देश को नहीं बेचेंगे।

इस बात के चलते पाकिस्तान और पाकिस्तान की मीडिया बौखला गयी है। उसको समझ ही नहीं आ रहा कि इस बात का क्या जवाब दे तभी बौखलाहट और बिलबिलापन में कुछ भी बोल रही है। पाक पत्रकार ‘कैसर खोखर’ का एक बेहद मज़ाकिया वीडियो सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ हैं जिसमे वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टमाटर मरने और भारत पर एटम बम गिराने की गीदड़ भभकी दे रहा है। पाक पत्रकार कैसर खोखर की बातों से पाकिस्तान की बौखलाहट का पता चलता है, पता चलता है कि भारत की ओर से पाकिस्तान पर कैसे शिकंजे का उसपर क्या असर पड़ रहा है।  इन महाशय को यहां तक समाज नहीं आ रहा कि उनको क्या बोलना चैओए क्यूंकि उनकी आधी बातों में तो सिर्फ ‘तौबा-तौबा’ ही सुनाई दे रहा है।
पाकिस्तानी मीडिया की बौखलाहट से साफ़ पट चल रहा है कि पाकिस्तान अब हताश और निराश हो चुका है, अगर ऐसा ही चलता रहा तो ये आतंकिस्तान कुछ दिन में अपने आप ही ना ख़त्म हो जाए।

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इस देश के डॉक्टरों ने किया बड़ा दावा, अब कमजोर पड़ने लगा है कोरोना वायरस

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस दुनियाभर के लगभग 62 लाख लोगों को अपना शिकार बना चुका है। इस खतरनाक बीमारी से मरने वालों की संख्या 3 लाख 71 हजार के पार चली गई है।

इस बीच इटली के टॉप डॉक्टर्स ने कोरोना को लेकर एक अच्छी खबर दी है। इस देश के डॉक्टर्स के दावे के मुताबिक  वायरस धीरे-धीरे अपनी क्षमता खो रहा है और अब उतना जानलेवा नहीं रह गया है।

डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना वायरस अब कमजोर पड़ रहा है। जेनोआ के सैन मार्टिनो अस्पताल में संक्रामक रोग प्रमुख डॉक्टर मैट्टेओ बासेट्टी ने ये जानकारी न्यूज एजेंसी ANSA को दी।

डॉक्टर मैट्टेओ ने कहा, कोरोना वायरस अब कमजोर हो रहा है. इस वायरस में अब वैसी क्षमता नहीं रह गई है जैसी दो महीने पहले थी। स्पष्ट रूप से इस समय की COVID-19 बीमारी अलग है।’

लोम्बार्डी के सैन राफेल अस्पताल के प्रमुख अल्बर्टो जांग्रिलो ने RAI टीवी को बताया,  ‘वास्तव में, वायरस क्लीनिकली रूप से अब इटली में मौजूद नहीं है। पिछले 10 दिनों में लिए गए स्वैब सैंपल से पता चलता है कि एक या दो महीने पहले की तुलना में अब इनमें वायरल लोड की मात्रा बहुत कम है।’

इटली में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक है और COVID-19 से होने वाली सबसे ज्यादा मौतों में इटली तीसरे नंबर पर है। हालांकि मई महीने में यहां संक्रमण के नए मामलों और मौतों में तेजी से गिरावट आई है और यहां कई जगहों पर सख्त लॉकडाउन को खोला जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय की एक मंत्री सैंड्रा जम्पा ने एक बयान में कहा, ‘कोरोना वायरस खत्म होने वाली बातों के लिए लंबित पड़े वैज्ञानिक प्रमाणों का सहारा लिया जा रहा है। मैं उन लोगों से कहती हूं कि इटली के लोगों को भ्रमित ना करें।’

सैंड्रा जम्पा ने कहा, ‘इसके बजाय हमें लोगों से अधिक सावधानी बरतने, फिजिकल डिस्टेंसिंग बनाए रखने, भीड़ में ना जानें, बार-बार हाथ धोने और मास्क पहनने के लिए कहना चाहिए।’

 

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