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पति ने पड़ोसी को दिया पत्नी को प्रेग्नेंट करने की जिम्मेदारी, 72 बार बनाया संबंध लेकिन फिर जो हुआ…

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रिश्तों की बात करें तो अब ये बहुत कमजोर होते जा रहे हैं। कई अजीबो-गरीब किस्से सुनने को मिलते हैं लेकिन आज एक ऐसा मामला बताने जा रहे जिसको जानकर सच में हैरानी होगी। यहां एक पति ने अपनी पत्नी को प्रेग्नेंट करने की जिम्मेदारी अपने पड़ोसी को दे दी।
जर्मनी में देमेत्रिअस सौपोलोस नाम के एक युवक ने अपनी पत्नी को गर्भवती करने का जिम्मा अपने पडोस में रहने वाले फ्रैंक मौस को सौंपा था। लेकिन जब वह उसे गर्भवती नहीं कर पाया तो सौपोलोस ने फ्रैंक के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा कर दिया।

मिली जानकारी के अनुसार, सौपोलोस अपनी पत्नी से बच्चा चाहता था मगर काफी प्रयास करने के बावजूद वह ऐसा करने में असफल रहा। इसलिए उन्होंने अपने पडोसी फ्रैंक को यह जिम्मा सौंप दिया। फ्रैंक ने भी 72 बार सौपोलास की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाए मगर फिर भी वह उसे गर्भवती करने में असफल रहे।

इस काम के लिए सौपोलोस ने फ्रैंक को काफी राशि भी दी। मगर अंत में फ्रैंक भी नाकामयाब ही रहे। फ्रैंस के दो बच्चे हैं लेकिन वो उसके नहीं हैं क्योंकि वो खुद भी बच्चा पैदा नहीं कर सकता। इस बात का खुलासा खुद उसकी पत्नी ने किया।

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मंगल पांडे को फांसी देने से जल्लाद ने कर दिया था इनकार, फिर अंग्रेजों ने किया ये काम

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नई दिल्ली। भारत को आजादी की बात करने पर सबसे पहले मंगल पांडे का नाम दिमाग में आता है। मंगल पांडे भारत को आजादी दिलाने के लिए अपनी जान देने वाले पहले भारतीय थे।

उनके द्वारा भड़काई गई क्रांति की ज्वाला से अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन बुरी तरह हिल गया था। आज उनकी 192वीं जयंती है। उनका जन्म आज ही के रोज  जन्‍म 1827 में 19 जुलाई को हुआ था।

अपनी हिम्मत और हौसले के दम पर समूची अंग्रेजी हुकूमत के सामने मंगल पांडे की शहादत ने भारत में पहली क्रांति के बीज बोए थे।

उनका जन्म 19 जुलाई, 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम  दिवाकर पांडे और मां का नाम श्रीमती अभय रानी था।

वे कलकत्ता (कोलकाता) के पास बैरकपुर की सैनिक छावनी में “34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री” की पैदल सेना के 1446 नंबर के सिपाही थे। भारत की आजादी की पहली लड़ाई अर्थात् 1857 के संग्राम की शुरुआत उन्हीं के विद्रोह से हुई थी।

18 अप्रैल, 1857 का दिन मंगल पांडे की फांसी के लिए निश्चित किया गया था। आपको बता दें, बैरकपुर के जल्लादों ने मंगल पांडे के खून से अपने हाथ रंगने से इनकार कर दिया।

तब कलकत्ता (कोलकाता) से चार जल्लाद बुलाए गए। 8 अप्रैल, 1857 के सूर्य ने उदित होकर मंगल पांडे के बलिदान का समाचार संसार में प्रसारित कर दिया।

 

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