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क्या 2016 में ही रच ली गई थी पुलवामा हमले की साज़िश? क्या कांग्रेस की मदद के लिए हुआ ये हमला?

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जम्मू-कश्मीर  के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में जैश-ए-मोहम्मद का हाथ है। इस बात की पुष्टी खुद जैश ने ली है। इस पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री में इमरान खान ने भी कहा कि पुलवामा हमले में पाकिस्तान का कोई हाथ नहीं है। इस पर उन्होंने भारत से सुबूत मांगे हैं और कार्यवाही करने को भी कहा है। लेकिन पाकिस्तान की 2016 की Senate Report कुछ और ही कहती है। उसकी माने तो पुलवामा की साजिश 2016 में ही कर ली गई थी।
senate report pakistan 2016बता दें पाकिस्तान की 2016 Senate Report में साफ-साफ लिखा है कि मोदी और आरएसएस को टारगेट करो। इतना ही नहीं इसके साथ ही अलग-थलग मुसलमान, दलित, सिखों के साथ ही माओवादी हिंसा को भड़काओ। सरकार की गलतियों को जोर-शोर से उजागर करो। रिपोर्ट में मोदी के खिलाफ माहौल बिगाड़ने का तरीका बताया गया है।

इस रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर का भी जिक्र किया गया है। जम्मू-कश्मीर में यु्वाओं को भड़का कर अपने साथ लाया जाए। कश्मीर मुद्दे पर पूरी तरह से साजिश की गई थी। इसके लिए अगल-अलग टीम भी गठित की गई थी। क्या पाकिस्तान के आतंकी संगठन मोदी सरकार से डरे हुए हैं।

Organisation of Islamic Corporation के 57 सदस्या देशों से कश्मीर मुद्दे पर दखल डलवाया जाए। पिछले दो सालों में भारत के विरोध के बावजूद पाकिस्तान की शह पर OIC में कश्मीर का मुद्दा उठता रहा है। क्या मोदी सरकार को रोकने के लिए पाकिस्तान चुनाव से ठीक पहले भारत में ऐसे हमला करा कर सबका ध्यान कश्मीर पर केंद्रित करना चाहता है।

बता दें कि एक बार कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान में बोला भी था कि हमारी मदद करिए। अब इससे हम क्या माने? क्या पाकिस्तान सच में कांग्रेस की मदद कर रहा है? शायद ये सब एक सोची समझी साजिश है जिसको अंजाम अब दिया जा रहा है।

बता दें कि सीनेट पाकिस्तान की संसद का ऊपरी सदन को कहा जाता है।

प्रादेशिक

Breaking: महाराष्ट्र में लगा राष्ट्रपति शासन

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मुंबई। महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है। बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यपाल की सिफारिश पर मुहर लगाते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन की मंजूरी दे दी है। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति शासन लगने के बाद राजभवन की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

आपको बता दें कि बीते मंगलवार शिवसेना द्वारा सरकार बनाने का दावा पेश नहीं कर पाने के बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने एनसीपी को सरकार बनाने का न्योता दिया था।

लेकिन करीब साढ़े ग्यारह बजे एनसीपी द्वारा राज्यपाल को पत्र लिखकर थोड़ा और समय मांगा गया जिसके बाद  राज्यपाल ने अपने विवेक से केंद्र सरकार को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी।

कैबिनेट मीटिंग में राज्यपाल की सिफारिश की केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से अनुशंसा कर दी जिसके बाद राष्ट्रपति ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की मंजूरी दे दी।

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