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CRPF काफिले के फिदायीन हमलवार का वीडियो आया सामने, भारत के खिलाफ जमकर उगली आग

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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में उरी से भी बड़ा आतंकी हमला हुआ है जिसमें आतंकियों ने एक बार फिर सुरक्षाबलों को निशाना बनाया है। छुट्टी मनाकर लौट रहे सुरक्षाबलों के काफिले पर जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन ने आत्मघाती हमला किया। इस काफिले में 2547 जवान शामिल थे। इस हमले 42 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए हैं जबकि 45 जवान घायल हैं जिनमें 18 जवानों की हालत गंभीर बताई जा रही है। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की ज़िम्मेदारी ली है। सीआरपीएफ कि 54वीं बटैलियन के जवानों को इस हमले में आतंकियों ने निशाना बनाया है।

इस हमले के बाद दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जरी कर दिया है। बताया जा रहा है कि आदिल अहमद डार उर्फ़ वकास नाम के आतंकी ने इस काफिले पर हमले कि साजिश रची थी। इसका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें वो भारत को धमकी देता हुआ नज़र आ रहा है। जैश ने यह वीडियो पुलवामा आतंकी हमले के तुरंत बाद जारी किया है। आपको बता दें आदिल पुलवामा के काकापोरा इलाके का रहने वाला है जिसने 2018 में आतंकी संगठन जैश में भर्ती ली थी।

 

सूत्रों के अनुसार सीआरपीएफ के जिस काफिले पर हमला किया गया उसमे 70 वाहन शामिल थे। सीआरपीएफ जवानों का काफिला जम्मू से श्रीनगर आ रहा था। आतंकियों ने जवानों के उस काफिले को निशाना बनाया जो बुलेट प्रूफ नहीं था और जिसमें सबसे ज़्यादा जवान थे। सीआरपीएफ के आईजी ज़ुल्फ़िकार हसन ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस जांच कर रही है। घायल जवानों को अस्पताल शिफ्ट किया गया है और विस्फोटक स्थल पर छानबीन की जा रही है

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कोरोनाः भारत में लॉकडाउन न होता तो इतने लाख हो सकते थे संक्रमित, शोध में हुआ खुलासा

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा दिया है। इस जानलेवा वायरस से अब तक 48 हजार से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। भारत में भी हाल के दिनों में इस वायरस ने तेजी से अपने पांव पसारे हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़े के मुताबिक कोरोना वायरस से अबतक 1965 लोग संक्रमित पाए गए हैं जबकि 151 लोगों का इलाज कर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है। इस बीच लॉकडाउन को लेकर हुए शोध में एक नई बात सामने आई है।

एक शोध के मुताबिक लॉकडाउन के 20वें दिन तक कोरोना वायरस के संभावित मामलों में 83 फीसदी तक कमी आ सकती है। यूपी के शिव नादर विश्वविद्यालय के इस अध्ययन से इस वायरस से लड़ने को लेकर उम्मीद जगी है।

अध्ययन के मुताबिक बंद की वजह से संदिग्ध लक्षण वाले लोगों को एक या दो दिन में ही अलग किया जा रहा है। अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि अगर लॉकडाउन न होता तो संक्रमित लोगों की संख्या 2 लाख 70 हजार 360 तक पहुंच जाती और 5407 लोगों की मौत हो जाती। शिव नादर विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर समित भट्टाचार्य के मुताबिक हम यह भी मानते हैं कि इससे 80 से 90 फीसदी लोग सामुदायिक दूरी में रह रहे हैं।

भट्टाचार्य ने कहा कि इस तरह की आशावादी स्थिति में हमने अनुमान लगाया है कि लॉकडाउन के पहले दिन से लेकर 20वें दिन तक में लक्षण दिखने वाले 83 फीसदी मामले कम हो सकते हैं। यानी इस तरह से संभावित 30,790 में से 3,500 लोग ही संक्रमित होंगे और 619 संभावित मौतों में से 105 ही मौत होंगी। देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 1965 तक पहुंच गई है जबकि मरने वालों की संख्या 50 है।

अनुसंधानकर्ताओं का मानना है कि देश में बंद की वजह से संक्रमण का एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संचार होने की गति धीमी होगी और संक्रमण के मामले कम होंगे।

विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर नागा सुरेश विरापु ने कहा कि हमारा अनुमान इस ओर इशारा करता है कि भारत में अगले 10 से 20 दिन में 5000 से 30,790 तक लक्षण वाले मामले हो सकते हैं।

 

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