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नेशनल

दिल्ली के होटल में लगी भीषण आग, 17 लोगों की मौत

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के करोलबाग स्थित होटल अर्पित पैलेस में मंगलवार की सुबह शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लग गई। आग लगने से 17 लोगों की मौत हो गई।

मिली जानकारी के मुताबिक शुरुआत में तो आग दूसरे फ्लोर पर थी, लेकिन उसके बाद तीसरे और चौथे फ्लोर पर भी आग फैली। शुरुआती जांच में होटल की लापरवाही की बात सामने आई है जिसकी वजह से मौत का आंकड़ा बढ़ता चला गया।

दिल्ली के होटल अर्पित पैलेस आग बुझाने पहुंचे अग्निशमन अधिकारी की मानें तो होटल में ज्यादातर लकड़ी इस्तेमाल हुआ है जिसकी वजह से आग तेजी से फैलती चली गई और पूरा होटल धुएं के गुबार से भर गया। अधिकारी के मुताबिक, ना सिर्फ फ्लोर की गैलरी बल्कि सीढ़ियों के पास भी लकड़ी का कवर लगा हुआ था।

उन्होंने बताया कि लकड़ी होने के कारण आग फैलती चली गई। इसके अलावा सीढ़ियां काफी संकरी थीं, जिसकी वजह से किसी भी व्यक्ति का तेजी से उतरना इतना आसान नहीं था।

मौके पर मौजूद अधिकारियों के मुताबिक, काफी लोगों की मौत धुएं की वजह से दम घुटने की वजह से हुई। जबकि दो लोगों ने ऊपरी मंजिल से छलांग लगा ली थी, इस वजह से उनकी मौत हुई।

अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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