Connect with us

अन्तर्राष्ट्रीय

850 रुपए में महिला ने खरीदी थी अंगूठी, 33 साल बाद असली कीमत जानकर उड़ गए होश!

Published

on

नई दिल्ली। आमतौर पर महिलाओं को हीरे की अंगूठी बहुत पसंद होती है। आज हम आपको हीरे की अंगूठी से जुड़ी एक ऐसी घटना बताने जा रहे हैं जिसे जानकर आपके पांव तले की जमीन खिसक जाएगी।

ब्रिटेन की रहने वाली एक महिला डेब्रा गॉर्डन को हीरे की अंगूठी पहनने का बहुत शौक था, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से वह असली हीरे की अंगूठी नहीं खरीद पा रही थी।

महिला ने हीरे की तरह दिखने वाली अंगूठी खरीदने का फैसला किया। उसने मार्केट से 850 रुपए (भारतीय मुद्रा के अनुसार) की अंगूठी खरीदी जिसे उसने लगभग 33 सालों तक इस्तेमाल किया लेकिन अचानक न जाने क्या महिला के दिमाग में आया कि उसने अंगूठी बेचने की सोची। इसके लिए उसने एक व्यक्ति से संपर्क किया।

हीरे को देखने के बाद व्यक्ति ने जब महिला अंगूठी के बारे में बताया तो उसके होश उड़ गए। व्यक्ति ने महिला को बताया कि वो जिस अंगूठी को नकली समझ कर पहन रही है, हकीकत में वो एक असली हीरे की अंगूठी है।

उसने बताया कि ये अंगूठी  26.27-k कैरट डायमंड से बनी है। इसके बाद महिला उस अंगूठी को लेकर हीरों के एक एक्सपर्ट के पास पहुंची, जहां एक्सपर्ट ने महिला को वो अंगूठी नीलाम करने की सलाह दी।

महिला की ‘नकली हीरे की अंगूठी’ को जब नीलामी के लिए रखा गया तो पता चला कि असल में वो हीरा बेहद ही प्राचीन था। नीलामी में वो अंगूठी 6 करोड़ 83 लाख रुपये में बिकी, जिसके बाद तमाम तरह के टैक्स काटकर महिला को करीब 4.5 करोड़ रुपये दिए गए।

 

अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

Published

on

नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

Continue Reading
Advertisement Aaj KI Khabar English

Trending