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मां ने अपनी ही बेटी से शादी करके बनाए संबंध और फिर 5 महीने बाद हुआ…

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बेटी से शादी

ये कलयुग की दुनिया बड़ी अजीब होती जा रही है और यहां कुछ भी संभव है। यहां एक मां ने अपने ही बेटी से शादी कर ली। हाल ही में एक 44 वर्षीय महिला ने अपनी ही बेटी से शादी कर ली, जिसके आरोप में आरोपी महिला को 10 साल की कैद सुनाई गई है। मामले का खुलासा तब हुआ जब उसकी 26 वर्षीय बेटी सिस्टी स्पैन ने इस बात का खुलासा किया।
मिली जानकारी के अनुसार, 44 वर्षीय महिला पैट्रिसिया स्पैन ने मार्च, 2016 में कॉमांन्से काउंटी में अपनी 26 वर्षीय बेटी सिस्टी स्पैन के साथ शादी कर ली थी। पुलिस ने बताया कि बेटी ने पांच महीने बाद ही मां पर धोखे से शादी करने का आरोप लगाया था। इसके बाद अदालत ने पैट्रिसिया को 10 साल की सजा सुनाई गई।

अमेरिका के ओक्लाहोमा में करीबी संबंधी के साथ शादी रचाने को अनैतिक माना जाता है। इतना ही नहीं चाइल्ड वेलफेयर इन्वेस्टीगेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2008 में महिला ने अपने बेटे से भी शादी कर ली थी।

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अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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