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नेशनल

राहुल गांधी ने पार्टी को दी एक सलाह, कहा- प्रियंका गांधी से किसी तरह के चमत्कार की उम्मीद ना रखें

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राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को दिल्ली में एक रणनीतिक बैठक की। इसमें उन्होंने पार्टी महासचिवों से अपील की के वो राज्य स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाने का काम करें। साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी और साथ में ज्योतिरादित्य सिंधिया से कोई चमत्कार की उम्मीद ना करें।
राहुल गांधीराहुल गांधी ने कहा ‘राज्य चुनावों पर ध्यान लगाए प्रभारियों को ‘मिशन मोड’ में काम करना होगा।रा हुल गांधी ने कांग्रेस को विभाजनकारी राजनीति और ध्रुवीकरण से लड़ना सिखने की हिदायत भी दी। उन्होंने बताया कि उम्मीदवारों के चयन को अंतिम रूप फरवरी में दिया जाएगा।

पार्टी मुख्यालय में AICC के महासचिवों और विभिन्न राज्यों के प्रभारियों के साथ बैठक में राहुल गांधी ने कहा कि नए चेहरों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। प्रियंका गांधी पूर्वी उत्तर प्रदेश में पार्टी मामलों की प्रभारी महासचिव के रूप में पहली बार AICC की बैठक में हिस्सा ले रहीं थी। उन्होंने कहा कि वह तब तक आराम नहीं करेंगी जब तक राज्य में कांग्रेस की विचारधारा का झंडा ऊंचा नहीं हो जाता।

मीटिंग के बाद ट्विटर पर राहुल गांधी ने कहा, “मैं आज शाम AICC मुख्यालय में AICC महासचिवों और राज्य प्रभारियों से मिला। हमने व्यापक विषयों पर चर्चा की। टीम मैच के लिए तैयार है और हम फ्रंट फुट पर खेलेंगे।”

अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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