Connect with us

नेशनल

“राम कोई भगवान नहीं बल्कि एक इंसान हैं! वहीं गाय कोई माता नहीं एक जानवर है घोड़े और कुत्तों की तरह”

Published

on

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस और Press Council of India के चेयरमैन रहे मार्कंडेय काटडजू ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। इस बार उन्होंने भगवान राम और गाय को लेकर विवादित बयान दे डाला। इनके इस बयान के बाद बवाल से मच गया है।
मार्कंडेय काटजू का कहना है की भगवान राम कोई भगवान नहीं बल्कि एक आम इंसान थे। गाय को बताया की वो एक जानवर है जैसे घोड़े और कुत्ते हैं। वो कैसे किसी की मां हो सकती हैं। ऐसे लोगों के दिमांग ने सिर्फ और सिर्फ गोबर भरा पड़ा।

काटजू ने कहा कि ये सब आगामी लोकसभा चुनाव में वोट पाने के लिए पॉलिटिक्स की जा रही है। राम मंदिर कोई मुद्दा नहीं है, असल में लोगों का सिर्फ ध्यान भटकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोग चाहे भूखे मर जाएं, बेरोजगार रहें, उसे कोई मुद्दा नहीं मान रहा है और राम मंदिर को मुद्दा बनाए बैठे हैं।

नेशनल

देश में कोरोना की वैक्सीन बना रहे हैं 30 ग्रुप, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने दी जानकारी

Published

on

नई दिल्ली। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने गुरुवार को कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 30 समूह कोरोना वायरस के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं, जिनमें बड़े उद्योग घरानों से लेकर शिक्षाविद् तक हैं।

उन्होंने कहा कि यह बहुत रिस्की प्रॉसेस है। दुनिया में बहुत सारे लोग वैक्सीन की बात कर रहे हैं, लेकिन यह पता नहीं है कि किसकी वैक्सीन प्रभावी होगी। अगर वैक्सीन वेस्ट हो जाती है तो नुकसान भी होता है।

राघवन ने कहा कि इन 30 में से 20 समूह बहुत तेज रफ्तार से काम कर रहे हैं। उन्होंने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘भारत में बड़े उद्योगों से लेकर शिक्षाविदों तक करीब 30 समूह कोविड-19 के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं जिनमें से 20 अच्छी रफ्तार से काम कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि वैक्सीन हम नॉर्मल लोगों को देते हैं न कि बीमार को और किसी भी अंतिम स्टेज के मरीज को इसलिए जरूरी है कि वैक्सीन की क्वालिटी और सेफ्टी को पूरी तरह से टेस्ट किया जाए। राघवन ने कहा कि सामान्य तौर पर टीका बनाने में करीब 10 साल लगते हैं, लेकिन दुनिया भर में कोरोना वायरस के लिए एक साल के अंदर टीका बनाने के लक्ष्य के साथ काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि नई दवा बनाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम होता है और इसी तरह टीका बनाने में बहुत लंबा वक्त लगता है।

उन्होंने कहा कि कई प्रयास विफल हो जाते हैं और इस तरह आपको बहुत कोशिशें करनी होती हैं। राधवन ने कहा कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद और एआईसीटीई ने भी दवा बनाने के प्रयास शुरू किए हैं।

Continue Reading
Advertisement Aaj KI Khabar English

Trending