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ऋषि कुमार शुक्ला बने सीबीआई के नए चीफ, दो साल रहेगा कार्यकाल

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नई दिल्ली। कई महीनों तक सीबीआई में चले घमासान के बाद आखिरकार देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी को उसका मुखिया मिल ही गया।

शनिवार को भारतीय पुलिस सेवा के सीनियर ऑफिसर ऋषि कुमार शुक्ला को सीबीआई का नया डायरेक्टर नियुक्त कर दिया गया। ऋषि मध्य प्रदेश के 1983 कैडर के ऑफिसर हैं। उनका कार्यकाल 2 साल के लिए होगा।

सीबीआई निदेशक बनने से पहले ऋषि कुमार शुक्ला मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक रह चुके हैं। डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक कैबिनेट की अप्वाइंटमेंट कमेटी ने उनकी नियुक्ति को हरी झंडी दी है।

शुक्रवार को हुई सीबीआई डायरेक्टर को नियुक्त करने वाली कमेटी की बैठक में कई नामों पर चर्चा होने के बाद ऋषि कुमार शुक्ल के नाम पर मुहर लगा दी गई।

आपको बता दें कि पिछले साल आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच टकराव को लेकर सीबीआई सुर्खियों में थी। आलोक वर्मा ने अपने ही डिप्टी राकेश अस्थाना पर करप्शन का आरोप लगाया था। इसके जवाब में राकेश अस्थाना केन्द्र सरकार को चिट्ठी लिखी थी और उनपर रिश्वत लेने का आरोप लगाया था।

पूर्व सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को निदेशक पद से हटाने के लिए उच्चस्तरीय तीन सदस्यों वाली कमेटी ने 2-1 से फैसला लिया था। इस बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी, न्यायमूर्ति सीकरी और कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हुए। खड़गे ने  बहुमत के फैसले का विरोध किया था।

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मंदिर का सुरक्षा गार्ड या पुलिस, किसके हिस्से में जाएंगे पांच लाख

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कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिस वालों का हत्यारा विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार कर लिया गया है। सात दिनों तक पुलिस से आंख मिचौली का खेल खेल रहा विकास दुबे आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ ही गया। अब सभी की नजरें उस इनामी राशि पर टिक गई हैं जो विकास दुबे को पकड़ने वाले को मिलने वाली थी।

विकास दुबे पर पहले 25 हजार का इनाम था, जिसको बढ़ाकर 50 हजार, फिर 1 लाख और फिर 2.5 लाख किया गया था। इसके बाद विकास दुबे पर इनामी राशि बढ़कर पांच लाख कर दी गई थी। अब सवाल ये उठता है है कि ये पांच लाख रु मंदिर के उस गार्ड को मिलेंगे जिसने विकास दुबे को सबसे पहले पहचाना था या फिर उज्जैन पुलिस जिसने उसे गिरफ्तार किया।

मंदिर परिसर की ओर से देखा जाए तो सवाल यह उठ रहा है कि अगर सुरक्षाकर्मियों ने ध्यान नहीं दिया होता तो शायद विकास वहां से भी भाग निकलता। इनामी राशि मध्यप्रदेश पुलिस को भी दी जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो मंदिर परिसर का सवाल करना भी वाजिब होगा। हालांकि इसमें पुलिस का पक्ष भी अपने आप में मजबूत है कि अगर पुलिस चौकन्नी नहीं रहती तो मंदिर परिसर द्वारा दी गई सूचना के बावजूद विकास फरीदाबाद की तरह वहां से भी भाग सकता था।

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