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सावधान! आधा कप जूस पीना हो सकता है आपके जानलेवा…

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कम पोषक तत्वों और ज्यादा शुगर की वजह से पहले ही लोग पैकेटबंद जूस से दूरी बनाने लगे हैं। लेकिन कंस्यूमर कोर्ट की इस रिपोर्ट के बाद शायद ही आप अपने बच्चों को पैकेटबंद जूस न पिलाए।

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आपको बता दें, बुधवार को कंस्यूमर कोर्ट ने पैकेटबंद जूस पर रिपोर्ट जारी की गयी है। परीक्षण के बाद पता चला है कि 45 जूस के ब्रांड मे कैडमियम, इनऑर्गैनिक आर्सेनिक, मर्करी और लेड अधिक मात्रा मे पाए गए है।

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इनमें से आधे प्रोडक्ट्स में धातुओं की मात्रा चिंताजनक थी। जबकि 7 प्रोडक्ट्स के जूस में भारी धातुओं की मात्रा इतनी ज्यादा थी कि अगर बच्चे दिन में आधा कप जूस भी पिएं तो उनकी सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।

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कंज्यूमर रिपोर्ट्स के चीफ साइंटिफिक ऑफिसर जेम्स डिकरसन ने बताया कि उन्होंने जिन खतरों की जांच की, वे सभी क्रोनिक एक्सपोजर की वजह से थे। चाहे आप वयस्क हो या बच्चे, बेहतर होगा कि आप पैक्ड जूस की मात्रा में कमी करें और उनकी जगह ताजे फलों का जूस पिए।

रिपोर्ट -मानसी शुक्ला

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मंगल पांडे को फांसी देने से जल्लाद ने कर दिया था इनकार, फिर अंग्रेजों ने किया ये काम

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नई दिल्ली। भारत को आजादी की बात करने पर सबसे पहले मंगल पांडे का नाम दिमाग में आता है। मंगल पांडे भारत को आजादी दिलाने के लिए अपनी जान देने वाले पहले भारतीय थे।

उनके द्वारा भड़काई गई क्रांति की ज्वाला से अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन बुरी तरह हिल गया था। आज उनकी 192वीं जयंती है। उनका जन्म आज ही के रोज  जन्‍म 1827 में 19 जुलाई को हुआ था।

अपनी हिम्मत और हौसले के दम पर समूची अंग्रेजी हुकूमत के सामने मंगल पांडे की शहादत ने भारत में पहली क्रांति के बीज बोए थे।

उनका जन्म 19 जुलाई, 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम  दिवाकर पांडे और मां का नाम श्रीमती अभय रानी था।

वे कलकत्ता (कोलकाता) के पास बैरकपुर की सैनिक छावनी में “34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री” की पैदल सेना के 1446 नंबर के सिपाही थे। भारत की आजादी की पहली लड़ाई अर्थात् 1857 के संग्राम की शुरुआत उन्हीं के विद्रोह से हुई थी।

18 अप्रैल, 1857 का दिन मंगल पांडे की फांसी के लिए निश्चित किया गया था। आपको बता दें, बैरकपुर के जल्लादों ने मंगल पांडे के खून से अपने हाथ रंगने से इनकार कर दिया।

तब कलकत्ता (कोलकाता) से चार जल्लाद बुलाए गए। 8 अप्रैल, 1857 के सूर्य ने उदित होकर मंगल पांडे के बलिदान का समाचार संसार में प्रसारित कर दिया।

 

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