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हो गया एलान : इस दिन बनेगा अयोध्या में भव्य राम मंदिर

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परम धर्म सांसद ने राम मंदिर को लेकर ऐतिहासिक एलान किया है। प्रयागराज के कुम्भ मे धर्म सांसद के पीठाधीश्वर स्वरूपानंद सरस्वती ने 21 फ़रवरी को राम मदिर के शिलान्यास कार्यक्रम का एलान कर दिया है। धर्म सांसद ने कहा कि ‘सभी साधू संत कुम्भ से सीधा अयोध्या जाएंगे व राम मंदिर की नीव रखेंगे।’

आपको बता दें, कुम्भ मेला में 28, 29 और 30 जनवरी को चले धर्म संसद के अंतिम दिन ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा पारित परम धर्मादेश में हिंदू समाज से बसंत पंचमी के बाद प्रयागराज से अयोध्या के लिए प्रस्थान करने का निर्णय लिया है।

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धर्म सांसद का कहना है कि उनके सब्र का बाण टूट गया है। राम मंदिर बनवाने के लिए अयोध्या मे एकत्रित हुए लोगों को चाहें गोलियां खानी पड़े या फिर जेल ही क्यों ना जाना पड़ जाए अब वह अपने कदम पीछे नहीं लेंगे।

धर्म सांसद के समापन के बाद जारी किए गए धर्मादेश मे कहा गया है कि “यदि धर्म सांसद की राह मे सत्ता के तीनो अंगो में से किसी ने भी दखलंदाज़ी की तो ऐसी स्थिति में संपूर्ण हिंदू जनता को यह धर्मादेश जारी किया गया है कि जब तक श्री रामजन्मभूमि विवाद का निर्णय नहीं हो जाता अथवा हमें राम जन्मभूमि प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक प्रत्येक हिंदू का यह कर्तव्य होगा कि वह चार इष्टिकाओं को अयोध्या ले जाकर वेदोक्त इष्टिका न्यास पूजन करें।”

रिपोर्ट – मानसी शुक्ला

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सुप्रीम कोर्ट ने संविधान से इंडिया शब्द हटाने वाली याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान से इंडिया शब्द हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को सुनवाई करते हुए कहा कि याचिका को सरकार के पास रिप्रेजेंटेशन के तौर पर माना जाए और केंद्र को ज्ञापन दिया जा सकता है। मुख्य न्यायधीश एसए बोबडे ने कहा कि हम ये नहीं कर सकते क्योंकि पहले ही संविधान में भारत नाम ही कहा गया है।

यह याचिका नमह (Namah) नामक दिल्ली के किसान की ओर से कोर्ट में डाली गई थी और संविधान के आर्टिकल-1 में बदलाव की मांग की गई थी। याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से ‘इंडिया’ को हटाकर ‘भारत’ नाम की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता का कहना था कि इंडिया नाम अंग्रेजों की गुलामी का प्रतीक है। देश का नाम अंग्रेजी में भी भारत करने से लोगों में राष्ट्रीय भावना बढ़ेगी और देश को अलग पहचान मिलेगी। याचिका दायर करने वाले नमह ने कहा कि प्राचीन काल में देश को भारत के नाम से जाना जाता था। आजादी के बाद अंग्रेजी में देश का नाम ‘इंडिया’ कर दिया गया इसलिए देश के असली नाम ‘भारत’ को ही मान्यता दी जानी चाहिए।

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