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नेशनल

उरी देखने अचानक सिनेमाहॉल पहुंचीं रक्षा मंत्री, जानिए फिर थिएटर के अंदर क्या हुआ!

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नई दिल्ली। विक्की कौशल की फिल्म उरी की कमाई बॉक्स पर थमने का नाम नहीं ले रही है। शनिवार को फिल्म ने 9.75 करोड़ की कमाई की जो इस फिल्म के पहेल दिन के कलेक्शन से ज्यादा है।

फिल्म की जबरदस्त कमाई को देखते हुए समीक्षकों को उम्मीद है कि यह फिल्म 200 करोड़ का आंकड़ा पार कर लेगी। उरी दर्शकों को खूब पसंद आ रही है।

इस बीच रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी वक्त निकालकर रविवार को कर्नाटक के बेलंदूर के पीवीआर में उरी मूवी देखने पहुंचीं। उनके साथ सेना के अधिकारी और रिटायर्ड सैनिक भी थे। रक्षा मंत्री ने खुद ट्वीट करके मूवी देखने के बारे में लोगों को जानकारी दी।

निर्मला सीतारमण 12.50 से 3 बजे के शो देखने के लिए वह पहुंची थीं। शो शुरू होने से पहले उन्होंने ट्विटर पर वीडियो भी जारी किया।

सीतारमण ने #HighJosh हैशटैग के साथ कई ट्वीट किए. उन्होंने @AdityaDharFilms, @yamigautam, @vickykaushal09 और @RonnieScrewvala को टैग करते हुए लिखा कि आखिरकार मूवी देखने के लिए आज वक्त मिल गया।

ट्विटर पर कई लोगों ने रक्षामंत्री को रिप्लाई में ट्वीट किए. @PMvasavada ने लिखा कि आप सुरक्षाबलों का हौसला बढ़ा रही हैं. आप पर हमें गर्व है. @adarshdgp ने लिखा कि यह ऐसी मूवी है जिसे सिर ऊंचाकर देखना चाहिए!

 

 

अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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