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आध्यात्म

नागा साधुओं के मरने के बाद उनके शव के साथ किया जाता है ऐसा काम, जानकर रह जाएंगे हैरान!

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नई दिल्ली। नागा साधुओं का जीवन बहुत ही रहस्यमयी होती है, यही वजह है कि लोग इनसे जुड़ी बातों को जानने में खासी दिलचस्पी रखते हैं।

लोग ये जानने के लिए अक्सर उत्साहित रहते हैं कि ये नागा साधू कहाँ से आते है और कहाँ जाते है? नागसाधु आम आदमी से बिल्कुल अलग होते हैं, इनका रहन-सहन खान-पान सब आम लोग की जिंदगी से भिन्न है।

आजकल प्रयागराज में नागसाधुओं का हुजूम सा उमड़ा हुआ है। आज हम नागा साधुओं के एक ऐसे राज से पर्दा उठाने जा रहे हैं जिसे जानकर आपकी रुह कांप जाएगी। बहुत कम ही लोगों को यह पता होता है कि नागा साधुओं के मरने के बाद उनके शव के साथ क्या किया जाता है।

हिन्दू मान्यता के अनुसार आमतौर पर मृत्यु के बाद शरीर को जलाया जाता है, क्योंकि माना जाता है कि मानव शरीर पंच (पांच) तत्वों से बना है और शरीर को उसी में विलीन करने के परंपरा है,किन्तु नागा साधुओ के शरीर को जलाया नहीं जाता, बल्कि उनकी मृत्यु के बाद उन्हें भू-समाधि देकर उनका अंतिम संस्कार किया जाता है।

नागा साधुओं को पहले जल समाधि दी जाती थी, लेकिन वर्तमान में नदियों का जल प्रदूषित होने के कारण अब उन्हें भू समाधि दी जाती है। नागा साधुओं को सिद्ध योग की मुद्रा में बैठाकर भू-समाधि दी जाती है।

 

आध्यात्म

गणेश चतुर्थीः इस शुभ मुहूर्त में करें मूर्ति स्थापना

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नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी आज यानी 2 सितम्बर धूमधाम से पूरे देश में मनाया जा रहा है। आज के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करने पर भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों को विशेष फल मिलता है। ऐसे में हम आपको बताएंगे कि गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा का शुभ मुहूर्त कब है।

गणेशजी की प्रतिमा को 2 सितंबर को विधि विधान से घर में स्थापित किया जाएगा। 9 दिनों तक विधिवत पूजा अर्चना के बाद 10 वें दिन यानि 12 सितंबर को मूर्ति विसर्जन कर दिया जाएगा।

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार गणेश जी का जन्म भादप्रद माह के शुक्ल पक्ष कि चतुर्थी को हुआ था। इस वर्ष यह दिन 2 सितंबर 2019 को पड़ रहा है। मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन दोपहर का समय पूजा अर्चना के लिए बड़ा ही शुभ माना जाता है।

इस वर्ष 2 सितंबर गणेश चतुर्थी की पूजा की अवधि 2 घण्टे 32 मिनट तक रहेगी। गणेश पूजा का शुभ मुहर्त सुबह 11 :04 से दोपहर 13 :37 तक रहेगा।

गणेश जी की मूर्ति स्थापना के बाद मूर्ति के सामने दिया जलाए। इसके बाद गणेश जी को मोदक का भोग लगाएं। ऐसा आप लगतार नौ दिन तक करें और 10वें दिन विधिपूर्वक गणपति जी की मूर्ति विसर्जित कर दें।

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