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अंबानी अपने घर के कचरे से करते हैं कुछ ऐसा, जो हम आप सपने में भी नहीं सोच सकते!

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नई दिल्ली। देश के  जाने-माने उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी अपने  उद्योगों कि वजह से  तो कभी चैरिटी  कि वजह से और कई बार अपने ऊंचे शौक  और महंगी सुख सुविधाओं के लिए हमेशा चर्चाओं में बने रहते है।

अंबानी की लाइफस्टाइल के बारे में भारत का हर व्यक्ति जानना चाहता है। आज हम आपको अंबानी की लाइफ से जुड़ी ऐसी बात बताने जा रहे हैं जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

क्या आपको पता है कि अंबानी के घर का कूड़ा कहा जाता है? नहीं पता तो हम बताते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि अंबानी के घर का कूड़ा फेंका नहीं जाता बल्कि उनके घर एंटीलिया  के कचरे का इस्तेमाल बिजली बनाने में किया जाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके घर में एक खास सिस्टम से कचरे से बिजली बनाई जाती है। सबसे पहले सूखे और गीले कचरे को अलग किया जाता है।

जिसके बाद बिजली बनाई जाती है। इतने बड़ा घर होने की वजह से बिजली की खपत बहुत ज्यादा होती है जिसकी वजह से घर के कूड़े का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए किया जाता है।

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मंगल पांडे को फांसी देने से जल्लाद ने कर दिया था इनकार, फिर अंग्रेजों ने किया ये काम

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नई दिल्ली। भारत को आजादी की बात करने पर सबसे पहले मंगल पांडे का नाम दिमाग में आता है। मंगल पांडे भारत को आजादी दिलाने के लिए अपनी जान देने वाले पहले भारतीय थे।

उनके द्वारा भड़काई गई क्रांति की ज्वाला से अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन बुरी तरह हिल गया था। आज उनकी 192वीं जयंती है। उनका जन्म आज ही के रोज  जन्‍म 1827 में 19 जुलाई को हुआ था।

अपनी हिम्मत और हौसले के दम पर समूची अंग्रेजी हुकूमत के सामने मंगल पांडे की शहादत ने भारत में पहली क्रांति के बीज बोए थे।

उनका जन्म 19 जुलाई, 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम  दिवाकर पांडे और मां का नाम श्रीमती अभय रानी था।

वे कलकत्ता (कोलकाता) के पास बैरकपुर की सैनिक छावनी में “34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री” की पैदल सेना के 1446 नंबर के सिपाही थे। भारत की आजादी की पहली लड़ाई अर्थात् 1857 के संग्राम की शुरुआत उन्हीं के विद्रोह से हुई थी।

18 अप्रैल, 1857 का दिन मंगल पांडे की फांसी के लिए निश्चित किया गया था। आपको बता दें, बैरकपुर के जल्लादों ने मंगल पांडे के खून से अपने हाथ रंगने से इनकार कर दिया।

तब कलकत्ता (कोलकाता) से चार जल्लाद बुलाए गए। 8 अप्रैल, 1857 के सूर्य ने उदित होकर मंगल पांडे के बलिदान का समाचार संसार में प्रसारित कर दिया।

 

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