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मायावती-राहुल के पीएम बनने का सपना हो सकता है चकनाचूर, यह नेता है रेस में सबसे आगे!

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में अब कुछ ही समय बचा है। सूत्रों के मुताबिक मार्च में आम चुनाव की तारीखों की घोषणा हो सकती है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को कड़ी टक्कर देने के लिए विपक्ष एकजुट होना शुरू हो गया है।

इसी कड़ी में आज यानि शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विपक्ष की ताकत दिखाने के लिए महारैली का आयोजन कर रही हैं।

ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि यह अब तक की सबसे बड़ी महारैली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ममता की इस महारैली में 11:30 बजे तक 20 विपक्षी दलों के नेता पहुंच चुके हैं।

विपक्ष द्वारा महारैली में 8 लाख लोगों के पहुंचने का दावा किया जा रहा है। ममता की इस महारैली के बाद एक बार फिर से यह सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि आखिर विपक्ष के प्रधानमंत्री का उम्मीदवार कौन होगा।

जहां एक ओर यूपी में अखिलेश और मायावती के गठबंधन के बाद मायावती प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी ठोंक रही हैं वहीं अब इस महारैली से ममता बनर्जी की पीएम पद की दावेदारी मजबूत हुई है।

ममता की इस महारैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तो नहीं पहुंचे लेकिन उन्होंने ममता को पत्र लिखकर उन्हें समर्थन दिया है। वहीं मायावती ने इस महारैली से खुद को दूर रखा है।

मायावती और ममता की अपनी-अपनी दावेदारी के बीच एक बात तो तय है कि इससे सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को होता दिख रहा है।

अगर ममता तमाम विपक्षी दलों को अपने पाले में करने में कामयाब रहीं तो राहुल के पीएम बनने के सपने को तगड़ा झटका लग सकता है।

 

 

 

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सुप्रीम कोर्ट ने संविधान से इंडिया शब्द हटाने वाली याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान से इंडिया शब्द हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को सुनवाई करते हुए कहा कि याचिका को सरकार के पास रिप्रेजेंटेशन के तौर पर माना जाए और केंद्र को ज्ञापन दिया जा सकता है। मुख्य न्यायधीश एसए बोबडे ने कहा कि हम ये नहीं कर सकते क्योंकि पहले ही संविधान में भारत नाम ही कहा गया है।

यह याचिका नमह (Namah) नामक दिल्ली के किसान की ओर से कोर्ट में डाली गई थी और संविधान के आर्टिकल-1 में बदलाव की मांग की गई थी। याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से ‘इंडिया’ को हटाकर ‘भारत’ नाम की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता का कहना था कि इंडिया नाम अंग्रेजों की गुलामी का प्रतीक है। देश का नाम अंग्रेजी में भी भारत करने से लोगों में राष्ट्रीय भावना बढ़ेगी और देश को अलग पहचान मिलेगी। याचिका दायर करने वाले नमह ने कहा कि प्राचीन काल में देश को भारत के नाम से जाना जाता था। आजादी के बाद अंग्रेजी में देश का नाम ‘इंडिया’ कर दिया गया इसलिए देश के असली नाम ‘भारत’ को ही मान्यता दी जानी चाहिए।

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