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महागठबंधन बनते ही अखिलेश-मायावती को लगा तगड़ा झटका, जानकर दंग रह जाएंगे आप!

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लखनऊ। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उत्तर प्रदेश के दो बड़े दल समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अब एक साथ चुनाव लड़ेंगे।

शनिवार को लखनऊ के होटल ताज में अखिलेश यादव और मायावती ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बात की औपचारिक घोषणा कर दी।

ताजा फॉर्मूले के मुताबिक दोनों पार्टियां 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी जबकि यह गठबंधन रायबरेली और अमेठी की सीटों पर उम्मीदवार नहीं उतारेगी।

लोकसभा चुनाव के लिए महागठबंधन बनते ही अखिलेश और मायावती को तगड़ा झटका लगते दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक गठबंधन से बाहर होने के बाद कांग्रेस ने अपने प्लान बी पर काम करना शुरू कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2009 में यूपी में 21 सीटें जीतने वाली कांग्रेस अब उन सीटों पर ज्यादा ध्यान देगी जिसपर वह बहुत कम अंतर से हारी थी।

आपको बता दें कि यूपी से पहले कांग्रेस, बीएसपी और सपा मध्य प्रदेश और छ्त्तीसगढ़ में गठबंधन करने वाली थी लेकिन सीट बंटवारे पर पेंच फंसने की वजह से इन राज्यों में यह गठबंधन न हो सका।

शायद यही वजह है कि चुनाव से पहले सीटों के बीच खींचतान से बचने के लिए सपा-बसपा ने कांग्रेस को गठबंधन से दूर रखना बेहतर समझा।

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बीजेपी के इस उम्मीदवार पर दर्ज हैं इतने मुकदमें, ब्योरा देने में भर गए चार पन्ने

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों को चुनाव आयोग में हलफनामे के जरिए अपनी पूरी डिटेल देने पड़ती है। हलफनामे में उम्मीदवार को अपने बारे में छोटी से छोटी जानकारी देनी होती है।

केरल की पट्टनमिट्टा लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार सुरेंद्रन ने भी एफिडेबिट के जरिए चुनाव आयोग को अपनी डिटेल दी है लेकिन इस जानकारी की वजह से उनका नाम सुर्खियों में आ गया है।

दरअसल, सुरेंद्रन के खिलाफ 242 आपराधिक मामले दर्ज हैं। जिसमें से 222 मामले केवल सबरीमाला से संबंधित हैं। भाजपा के मुखपत्र जन्मभूमि में उन्होंने इन आपराधिक मामलों के बारे में ब्योरा दिया है।

जिसमें चार पेज लग गए। पार्टी को अपने टीवी चैनल जनम टीवी पर सुरेंद्रन के आपराधिक मामलों का ब्योरा देने में 60 सेकेंड का समय लगा। जबकि अन्य उम्मीदवारों के बारे में ब्योरा देने में केवल सात सेकेंड का समय लगा।

पार्टी के एक आधिकारिक सूत्र ने बताया, ‘यदि किसी दूसरे अखबार के केवल एक संस्करण में उनके ब्योरे के बारे में विज्ञापन दिया जाता तो उसका खर्च करीब 60 लाख रुपये आता। टीवी पर इसका खर्च और ज्यादा आता।’

चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने खिलाफ लंबित मामलों के बारे में प्रिंट और टीवी पर तीन बार विज्ञापन दें।

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