Connect with us

नेशनल

वेब जर्नलिस्ट को हक दिलाने राज्यसभा पहुंची WMA की नेशनल बॉडी

Published

on

नई दिल्ली। बुधवार को दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में वेब मीडिया एसोसिएशन (WMA) द्वारा राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक की गई। इस बैठक के बाद कार्यकारिणी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर जोशी ने सभी को राज्यसभा में की कार्यवाही देखने के लिए आमंत्रित किया। इस मौके पर वेब मीडिया एसोसिएशन द्वारा भविष्य में किए जाने वाले कार्यों से माननीय सांसदों को अवगत कराया।


बता दें कि सदन की कार्यवाही देखने के बाद सदस्यों ने प्रमुख सांसदों से वेब मीडिया के विस्तार पर बातचीत भी की। कार्यकारिणी के सदस्यों ने बताया की इसका विस्तार हिंदी भाषी राज्यों के साथ ही पूर्वी राज्यों और दक्षिण भारत के राज्यों में भी किया जाए।
WMA की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में शामिल सदस्यों में संरक्षक डॉ चंद्रसेन वर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर जोशी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नवनीत अग्रवाल, WMA के महामंत्री मो0 कामरान, मोजो इंडिया से आए इंद्रेश रस्तोगी, उत्तराखंड के प्रदेश संयोजक अरुण कुमार यादव, पंजाब के अमनदीप मेहरा, हरियाणा के वेद पंडित और प्रमोद कौशिक व अन्य सदस्य मौजूद रहे।
देश के विभिन्न राज्यों से आए वेब मीडिया के जर्नलिस्टों की बैठक से ये साफ हो गया है कि वेब मीडिया के हित में काम करने वाले सभी जर्नलिस्ट के ल्ए WMA सदैव तैयार रहेगा। इसका साथ ही एसोसिएशन वेब मीडिया के जर्नलिस्ट को उनके अधिकार दिलाने में हमेशा मदद करेगी।

नेशनल

बीजेपी के इस उम्मीदवार पर दर्ज हैं इतने मुकदमें, ब्योरा देने में भर गए चार पन्ने

Published

on

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों को चुनाव आयोग में हलफनामे के जरिए अपनी पूरी डिटेल देने पड़ती है। हलफनामे में उम्मीदवार को अपने बारे में छोटी से छोटी जानकारी देनी होती है।

केरल की पट्टनमिट्टा लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार सुरेंद्रन ने भी एफिडेबिट के जरिए चुनाव आयोग को अपनी डिटेल दी है लेकिन इस जानकारी की वजह से उनका नाम सुर्खियों में आ गया है।

दरअसल, सुरेंद्रन के खिलाफ 242 आपराधिक मामले दर्ज हैं। जिसमें से 222 मामले केवल सबरीमाला से संबंधित हैं। भाजपा के मुखपत्र जन्मभूमि में उन्होंने इन आपराधिक मामलों के बारे में ब्योरा दिया है।

जिसमें चार पेज लग गए। पार्टी को अपने टीवी चैनल जनम टीवी पर सुरेंद्रन के आपराधिक मामलों का ब्योरा देने में 60 सेकेंड का समय लगा। जबकि अन्य उम्मीदवारों के बारे में ब्योरा देने में केवल सात सेकेंड का समय लगा।

पार्टी के एक आधिकारिक सूत्र ने बताया, ‘यदि किसी दूसरे अखबार के केवल एक संस्करण में उनके ब्योरे के बारे में विज्ञापन दिया जाता तो उसका खर्च करीब 60 लाख रुपये आता। टीवी पर इसका खर्च और ज्यादा आता।’

चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने खिलाफ लंबित मामलों के बारे में प्रिंट और टीवी पर तीन बार विज्ञापन दें।

Continue Reading
Advertisement Aaj KI Khabar English

Trending