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मोदी सरकार का बड़ा तोहफा, जल्द पूरा होगा मिडिल क्लास के लोगों का ये सपना !

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बीते बधुवार राज्यसभा में आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए 10 फ़ीसदी आरक्षण लागू करने के लिए 124वां संविधान संशोधन बिल पास किया। 3 राज्यों में मिली हार के बाद अब बीजेपी मिशन 2019 में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। सवर्ण आरक्षण बिल के बाद मिडिल क्लास लोगों के लिए तोहफा ला सकती है।

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दरअसल, 1 फरवरी को वित्त मंत्री अरुण जेटली अंतरिम बजट पेश करेंगे। इस बजट के साथ यह कयास लगाया जा रहा है कि सरकार मिडिल क्लास के लोगों के लिए तोहफा ला रही है। सूत्रों की माने तो मोदी सरकार अपने अंतरिम बजट में मिडिल क्लास के लिए इनकम टैक्स में छूट की दर को ढाई लाख रुपए से बढाकर 3 लाख रुपए कर सकते है।

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सूत्रों के मुताबिक – सरकार मिडिल क्लास लोगों को घर खरीदने के लिए होम लोन के ब्याज दर में बड़ी राहत देने की तैयारी कर रही है। आपको याद होगा कि 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान ही बीजेपी ने किया था कि सबके पास अपना घर होगा। अब वो अपने उसी वादे को पूरा करती नजर आ सकती है। सरकार होम लोन के रेट को कम कर सकती है।

रिपोर्ट – सृष्टि श्रीवास्तव

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बीजेपी के इस उम्मीदवार पर दर्ज हैं इतने मुकदमें, ब्योरा देने में भर गए चार पन्ने

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों को चुनाव आयोग में हलफनामे के जरिए अपनी पूरी डिटेल देने पड़ती है। हलफनामे में उम्मीदवार को अपने बारे में छोटी से छोटी जानकारी देनी होती है।

केरल की पट्टनमिट्टा लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार सुरेंद्रन ने भी एफिडेबिट के जरिए चुनाव आयोग को अपनी डिटेल दी है लेकिन इस जानकारी की वजह से उनका नाम सुर्खियों में आ गया है।

दरअसल, सुरेंद्रन के खिलाफ 242 आपराधिक मामले दर्ज हैं। जिसमें से 222 मामले केवल सबरीमाला से संबंधित हैं। भाजपा के मुखपत्र जन्मभूमि में उन्होंने इन आपराधिक मामलों के बारे में ब्योरा दिया है।

जिसमें चार पेज लग गए। पार्टी को अपने टीवी चैनल जनम टीवी पर सुरेंद्रन के आपराधिक मामलों का ब्योरा देने में 60 सेकेंड का समय लगा। जबकि अन्य उम्मीदवारों के बारे में ब्योरा देने में केवल सात सेकेंड का समय लगा।

पार्टी के एक आधिकारिक सूत्र ने बताया, ‘यदि किसी दूसरे अखबार के केवल एक संस्करण में उनके ब्योरे के बारे में विज्ञापन दिया जाता तो उसका खर्च करीब 60 लाख रुपये आता। टीवी पर इसका खर्च और ज्यादा आता।’

चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने खिलाफ लंबित मामलों के बारे में प्रिंट और टीवी पर तीन बार विज्ञापन दें।

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