Connect with us

ऑफ़बीट

अगर आप भी फ़ोन रखते है इस जगह तो संभल जाइए, हो सकते है नपुंसकता के शिकारी

Published

on

आज के दौर में हम सब लोग फ़ोन से दूर नहीं रह सकते है। आदत इतनी बुरी होगी है कि सोते समय स्मार्टफोन को अपने सिरहाने रखते है। अगर आप भी ये काम करते है, तो सभंल जाइए। दरअसल, ब्रिटेन की एक्जिटर सहित कई यूनिवर्सिटी के अध्ययन में मोबाइल से निकलने वाली विकिरणों को कैंसर से लेकर नपुंसकता तक के खतरे से जोड़ा गया है।

IMAGE COPYRIGHT: GOOGLE

इस शोध में इस बात का पता चला कि फोन से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरणों को संभावित कार्सिनोजन (कैंसरकारी तत्वों) की श्रेणी में रखा है। साथ ही फ़ोन का ज्यादा यूज़ मस्तिष्क और कान में ट्यूमर पनपने की वजह बन सकता है, जिसके आगे चलकर कैंसर का भी रूप अख्तियार करने की आशंका रहती है।

बता दें, 2014 में प्रकाशित एक अध्ययन में फोन से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरणों का नपुंसकता से सीधे संबंध पाया गया था। शोधकर्ताओं ने बताया कि पैंट की जेब में फोन रखने से पुरुषों में न सिर्फ शुक्राणुओं का उत्पादन घटता है, बल्कि अंडाणुओं को निषेचित करने की उसकी गति भी धीमी पड़ जाती है।

IMAGE COPYRIGHT: GOOGLE

शोधकर्ताओं का कहना था कि फोन, कंप्यूटर और टीवी की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी ‘स्लीप हार्मोन’ मेलाटोनिन का उत्पादन बाधित करती है। इससे व्यक्ति को न सिर्फ सोने में दिक्कत पेश आती है, बल्कि सुबह उठने पर थकान, कमजोरी और भारीपन की शिकायत भी सताती है।

अन्तर्राष्ट्रीय

वैज्ञानिकों ने खोल दिया नर्क का दरवाजा, उठ रही हैं बेकाबू आग की लपटें!

Published

on

नई दिल्ली। दुनिया में कई ऐसी घटनाएं घटती हैं, जिसके आगे विज्ञान भी नत्मस्तक हो जाता है। ऐसी ही एक घटना के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे।

तुर्कमेनिस्तान के काराकुम रेगिस्तान में एक लंबे चौड़े गढ्ढे से भयानक आग की लपटें निकल रही हैं। यह रहस्यमई आग लगभग 47 सालों से इस गढ्ढे से निकल रही है। स्थानीय लोग इसे नर्क का द्वार कहते हैं।

दरअसल, साल 1971 में वैज्ञानिकों का एक दल प्राकृतिक गैस की खोज में तुर्कमेनिस्तान के काराकुम रेगिस्तान पहुंचा और वहां पर एक गड्ढा खोदा गया। गड्ढे के आसपास बड़ी-बड़ी मशीनें लगाई गईं और जमीन के अंदर खुदाई शुरू की गई।

एक दिन अचानक यह हिस्सा भरभरा कर गिर गया जिसकी वजह से यहां 130 फीट चौड़ा और 60 फीट गहरा बड़ा गढ्ढा हो गया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने सोचा कि इस गैस को जला दिया जाए तो कुछ दिनों बाद अपने आप ये गैस खत्म हो जाएगी और आग बुझ जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

ये गैस आजतक बिना बुझे जल रही है। स्थानीय सरकार ने इस गड्ढे को भरने की कई बार कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। अब ये जगह लोगों के बीच काफी फेमस हो चुकी हैं। दूर-दूर से लोग इस नर्क के द्वार को देखने आते हैं।

Continue Reading
Advertisement Aaj KI Khabar English

Trending