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2,000 के नोट मार्किट से हो रहे है गायब, क्या है इसका रहस्य?

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शुक्रवार को सरकार ने संकेत दिया है कि दो हजार रुपए के नोटों की छपाई बंद कर दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2 हजार रुपए के नोटों की छपाई को फिलहाल के लिए रोक दिया गया है। क्योंकि चलन में यह नोट पर्याप्त मात्रा में है। गौरतलब है कि नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद 2,000 रुपये का नोट पेश किया गया था।

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आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि ‘मूल्य के संदर्भ में कुल मुद्रा का 35 फीसदी 2,000 रुपये के नोट के रूप में प्रचलन में है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘नोटों की छपाई जरूरत के हिसाब से की जा रही है। हाल में 2,000 रुपये के नोटों की छपाई बंद करने का कोई फैसला नहीं किया गया है’।

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आपको बता दें, सरकार ने 8 नवंबर 2016 को 500 और 1,000 रुपये के नोटों को चलन से हटा दिया था। उसके बाद रिजर्व बैंक ने 500 के नए नोट के साथ 2,000 रुपये का भी नोट जारी किया।

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जेसीबी से ढहाया गया विकास दुबे का घर, गाड़ियां की गईं तहस-नहस

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कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिस वालों की जान लेने वाले हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की तलाश में पुलिस की 100 टीमें लगी हुई हैं। आशंका जताई जा रही है कि वारदात को अंजाम देने के बाद विकास नेपाल भाग गया है। इस बीच विकास दुबे के घर को जिला प्रशासन द्वारा ध्वस्त कर दिया। इस दौरान वहां खड़ी कारों को भी कुचल दिया गया। प्रशासन ने उसी जेसीबी से उसके घर को गिराया जिसका इस्तेमाल उसने पुलिस वालों का रास्ता रोकने के लिए किया था। शनिवार सुबह से पुलिस और प्रशासन की टीमें बिकरु गांव पहुंच गई थीं।

बता दें कि गुरुवार देर रात कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के गांव बिकरू निवासी कुख्यात अपराधी विकास दुबे को उसके गांव पकड़ने पहुंची पुलिस टीम पर हमला कर दिया गया था जिसमें एक क्षेत्राधिकारी, एक थानाध्यक्ष समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए. मुठभेड़ में पांच पुलिसकर्मी, एक होमगार्ड और एक आम नागरिक घायल है।

पुलिस को मुखबिरी का शक

कानपुर में आठ पुलिस कर्मियों की निर्ममता ने हत्या करने वाला हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे अभी फरार है। बताया जा रहा है कि रात को ही वारदात को अंजाम देने के बाद विकास दुबे नेपाल भाग गया है। इन सबके बीच एक सवाल सभी के मन में उठ रहा है कि आखिर विकास दुबे को पुलिस टीम के आने की भनक पहले से ही कैसे लग गई थी, क्योंकि जिस तरह विकास ने पूरी प्लानिंग के साथ घटना को अंजाम दिया उससे साफ़ पता चलता है उसे पहले से पूरी जानकारी थी। एसटीएफ को भी इस बात का शक है कि विकास दुबे को पुलिस के ही किसी भेदिये ने पहले ही सूचना दे दी थी। इसी शक को यकीन में बदलने के लिए पुलिस ने विकास के कॉल डिटेल निकलवाए हैं जिनमें कुछ पुलिस वालों के भी नंबर मिले हैं।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि चौबेपुर थाने के ही एक सब इंस्पेक्टर ने विकास दुबे को पुलिस के आने की सूचना दी थी। मुठभेड़ के दौरान वह सबसे पीछे थे और फायरिंग होते ही वह वहां से भाग गए। इस वक्त पुलिस को एक दरोगा, सिपाही और होमगार्ड पर शक है। तीनों की कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। बता दें कि मामले की जांच एसटीएफ गठित हुई है। यूपी पुलिस ने विकास दुबे का सुराग देने वाले को 50 हजार रुपये के इनाम का ऐलान भी किया है। विकास दुबे के पास एके-47 और अडवांस हथियार भी थे।

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