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राजस्थान के डिप्टी CM बने सचिन पायलट से ज्यादा कमाती हैं उनकी वाइफ सारा

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राजनीति में उभरता हुआ नाम कांग्रेस के युवा नेता और राजस्थान के डिप्टी सीएम बने सचिन पायलट हैं। इन दिनों सचिन पालयट सुर्ख़ियों में हैं । लेकिन सचिन से ज्यादा लोग उनकी बीबी के बारे में जानना चाहते हैं। सचिन पायलट की पत्नी सारा हैं।

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सचिन पायलट और सारा की लव स्टोरी के बारे में आप पहले भी कई बार सुन चुके होंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि सारा की कमाई पायलट से ज्यादा है। आइए जानते हैं, सचिन और सारा के बारे में –

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खूबसूरती के मामले में कई एक्ट्रेस को टक्कर देने वालीं सारा काफी ग्लैमरस हैं। ग्लैमरस के साथ वे कमाई के मामले में भी पीछे नहीं हैं। सचिन को दूसरे धर्म की लड़की से प्यार हुआ, फिर उससे शादी की। यह लड़की कोई और नहीं बल्कि जम्मू- कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्लाह की बेटी सारा अब्‍दुल्‍लाह हैं।

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हाल में हुए विधानसभा चुनाव से पहले पायलट की ओर से दिए गए एफिडेविट में उन्होंने अपनी संपत्ति 5 करोड़ घोषित की थी। एफिडेविट के अनुसार, सचिन की आमदनी पत्नी सारा से काफी कम है। उनकी इनकम 10 लाख रुपए बताई गई है।

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बता दें, सारा पायलट की कमाई सालाना 19 लाख रुपए से ज्यादा की है। सारा और सचिन के दो बेटे हैं, आरान और वीहान। हलफनामे में बड़े बेटे के नाम 13.68 लाख और छोटे बेटे के नाम 2.59 लाख रुपये की चल संपत्ति दिखाई गई है।

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सरकारी पेंशन पर सरकार ने लिया बड़ा फैसला, इन्हें मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ!

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी एक के बाद एक मास्टर स्ट्रोक लगा रही है। हाल ही में किसानों का दोबारा कर्ज माफी की खबर आने के बाद अब एक बार फिर योगी कैबिनेट बड़ा फैसला ले सकती है।

सूत्रों के मुताबिक योगी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले सरकारी पेंशन लिए अपना खजाना खोल सकती है। लेकिन इस बार यह पेंशन सरकारी कर्मचारियों को नहीं बल्कि साधुसंतो को दिया जाएगा।

वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत सूबे के सभी जिलों में प्रदेश सरकार शिविर लगाकर साधु-संतों को प्रोत्साहित करके इस योजना के दायरे में शामिल कर उन्हें लाभ देगी।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में अभी तक चल रही पेंशन योजना में साधु-संतों को इसलिए शामिल नहीं किया जाता था, क्योंकि उनके पास मूलभूत कागजात और दस्तावेज नहीं होते थे।

पिछली सरकारें भी संतों को यह देने के प्रति उदासीन रवैया ही अपनाती थी, लेकिन अब योगी सरकार ने हर जिले में शिविर लगा वृद्धावस्था पेंशन में छूटे हुए लोगों को शामिल करने का फैसला किया है। इसमें विशेष तौर पर ध्यान दिया जाएगा कि साधु-संतों को भी शामिल किया जाए।

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