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आध्यात्म

इन 6 राशियों का बनने जा रहा है राजयोग, होगी हर इच्छा पूरी, मिल सकती है बड़ी खुशखबरी

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हम सभी जानते है कि हमारे जीवन में आने वाले सभी बदलाव का मुख्य कारण ग्रहों की चाल होती है। ज्योतिष की मानें तो ग्रह परिवर्तन कुछ राशियों के लिए शुभ होगा। इस परिवर्तन के बाद जीवन में खुशियों का समय आने वाला है। साथ में ही बड़े लाभ हो सकते है। आइए जानते है इन राशियों के बारे में –

इन राशि वालों का अच्छा समय आने वाला है। आर्थिक लेन-देन में सावधानी बरतनी होगी। व्यापार में आपको बड़ा लाभ प्राप्त होगा। मां लक्ष्मी की कृपा आपको प्राप्त होगी। पैतृक संपत्ति को लेकर कोई विवाद आपके सामने आ सकता है।

किसी समस्या के कारण मानसिक तनाव भी रह सकता है आपको चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। आपके जीवन में एक नए दौर की शुरुआत होगी जो कि आपके भविष्य के लिए काफी लाभकारी सिद्ध होगी। इन राशि के लोगो का आत्मविश्वास बढ़ेगा। यात्रा करने के योग बन रहे है।

इन राशि वालों को आज के दिन में ढेर सारी खुशियां मिलेगी,संतान की ओर से कोई बड़ी खुशखबरी प्राप्त हो सकती हैं। आपके आने वाले दिन धन लाभ के नज़रिए से अत्यंत लाभदायक है। जिन राशियों में यह योग बन रहे है वो राशियां हैं – कुंभ,मकर,मीन,मिथुन,तुला और मेष हैं।

आध्यात्म

गणेश चतुर्थीः इस शुभ मुहूर्त में करें मूर्ति स्थापना

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नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी आज यानी 2 सितम्बर धूमधाम से पूरे देश में मनाया जा रहा है। आज के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करने पर भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों को विशेष फल मिलता है। ऐसे में हम आपको बताएंगे कि गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा का शुभ मुहूर्त कब है।

गणेशजी की प्रतिमा को 2 सितंबर को विधि विधान से घर में स्थापित किया जाएगा। 9 दिनों तक विधिवत पूजा अर्चना के बाद 10 वें दिन यानि 12 सितंबर को मूर्ति विसर्जन कर दिया जाएगा।

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार गणेश जी का जन्म भादप्रद माह के शुक्ल पक्ष कि चतुर्थी को हुआ था। इस वर्ष यह दिन 2 सितंबर 2019 को पड़ रहा है। मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन दोपहर का समय पूजा अर्चना के लिए बड़ा ही शुभ माना जाता है।

इस वर्ष 2 सितंबर गणेश चतुर्थी की पूजा की अवधि 2 घण्टे 32 मिनट तक रहेगी। गणेश पूजा का शुभ मुहर्त सुबह 11 :04 से दोपहर 13 :37 तक रहेगा।

गणेश जी की मूर्ति स्थापना के बाद मूर्ति के सामने दिया जलाए। इसके बाद गणेश जी को मोदक का भोग लगाएं। ऐसा आप लगतार नौ दिन तक करें और 10वें दिन विधिपूर्वक गणपति जी की मूर्ति विसर्जित कर दें।

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