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जानिए किसके कहने पर एमजे अकबर ने दिया इस्तीफा!

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एमजे अकबर

नई दिल्ली। 20 महिलाओं द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोपों से चौतरफा अलोचना झेल रहे एमजे अकबर ने बुधवार को आखिरकार विदेश राज्य मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

अकबर पर पहला आरोप प्रिया रमानी नाम की वरिष्ठ पत्रकार ने लगाया था जिसके बाद उन पर आरोपों की झड़ी लग गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अकबर ने पद से इस्तीफा पीएम मोदी के कहने पर दिया है।

पार्टी का मानना है कि अकबर पर लगातार लग रहे आरोपों से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। इस्तीफा देने के बाद अकबर ने कहा, ‘‘चूंकि मैंने निजी तौर पर कानून की अदालत में न्याय पाने का फैसला किया है, इसलिए मुझे यह उचित लगा कि मैं अपने पद से इस्तीफा दे दूं।’’

बयान में उन्होंने आगे कहा है ‘‘मैं, अपने खिलाफ लगाए गए झूठे आरोपों को निजी तौर पर चुनौती दूंगा। अत: मैं विदेश राज्य मंत्री पद से त्यागपत्र देता हूं।’’ उन्होंने कहा ‘‘मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का बेहद आभारी हूं कि उन्होंने मुझे देश की सेवा करने का अवसर दिया।’’

आपको बता दें कि पांच राज्यों में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में बीजेपी की छवि को नुकसान न पहुंचे इसे सोचकर अकबर का इस्तीफा लिया गया है। साढ़े चार साल में यह पहला मौका है जब भाजपा के किसी मंत्री ने इस्तीफा दिया है।

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रेलवे में ख़त्म होगा खलासी सिस्टम, नहीं होंगी नई भर्तियां

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नई दिल्ली। अगर आप भी भारतीय रेलवे में नौकरी करने का सपना संजोए हुए हैं तो आपके लिए बुरी खबर है। दरअसल रेलवे अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आवास पर काम करने वाले ‘बंगला पियुन’ या खलासियों की नियुक्ति की औपनिवेशिक काल की प्रणाली को समाप्त करने की तैयारी कर रहा है और इस पद पर अब कोई नई भर्ती नहीं की जाएगी। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को आदेश जारी किया।

रेलवे बोर्ड ने आदेश में कहा है कि टेलीफोन अटेंडेंट सह डाक खलासी (TADK) संबंधी मामले की समीक्षा की जा रही है. आदेश में कहा गया है, ‘टीएडीके की नियुक्ति संबंधी मामला रेलवे बोर्ड में समीक्षाधीन है इसलिए यह फैसला किया गया है कि टीएडीके के स्थानापन्न के तौर पर नए लोगों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए और न ही तत्काल नियुक्ति की जानी चाहिए।

आदेश में कहा गया है, ‘इसके अलावा, एक जुलाई 2020 से इस प्रकार की नियुक्तियों को दी गई मंजूरी के मामलों की समीक्षा की जा सकती है और इसकी स्थिति बोर्ड को बताई जाएगी। इसका सभी रेल प्रतिष्ठानों में सख्ती से पालन किया जाए।

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