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Internet ठप : अगले 48 घंटों तक दुनियाभर में इंटरनेट Shutdown!

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हाल में ही एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 48 घंटों तक पूरी दुनिया में इंटरनेट सेवा बंद रहेगी। इसके चलते अगले दो दिन लोगों के लिए मुश्किल भरे हो सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, इंटरनेट शटडाउन का असर पूरी दुनिया में होगा। यह भी साफ नहीं है कि कब और कहां इंटरनेट की सेवा बंद होगी और कितनी-कितनी देर के लिए बंद होगी।

जानकारी के मुताबिक, यह मेंटेनेंस या दूसरे शब्दों में कहें तो अपडेट इसलिए किया जा रहा है ताकि इंटरनेट को पहले के मुकाबले सुरक्षित बनाया जाए। दावा है कि अपडेट के बाद डोमेन पहले से अधिक सुरक्षित होंगे।

1995 में दुनिया की एक फीसदी से भी कम आबादी ऑनलाइन थी और इसे सिर्फ पश्चिम में यूज़ किया जाता था। वहीं आज 20 साल से ज्यादा हो चुके हैं और अब करीब दुनिया की आधी आबादी (3.5 बिलियन) के पास इंटनेट कनेक्शन है। इस संख्या में प्रति सेकेंड 10 लोगों का इजाफा हो रहा है।

इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकनॉमिक रिलेशंस (ICRIER) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2012-17 के बीच इंटरनेट सेवा बंद होने से भारत को करीब 3 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। ऐसे में अगर अगले दो दिन इंटरनेट की सेवाएं बंद होती हैं, तो दुनिया भर में करोड़ों डॉलर का नुकसान हो सकता है। इसके साथ ही और भी कई परेशानियां आ सकती हैं।

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बीजेपी के इस उम्मीदवार पर दर्ज हैं इतने मुकदमें, ब्योरा देने में भर गए चार पन्ने

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों को चुनाव आयोग में हलफनामे के जरिए अपनी पूरी डिटेल देने पड़ती है। हलफनामे में उम्मीदवार को अपने बारे में छोटी से छोटी जानकारी देनी होती है।

केरल की पट्टनमिट्टा लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार सुरेंद्रन ने भी एफिडेबिट के जरिए चुनाव आयोग को अपनी डिटेल दी है लेकिन इस जानकारी की वजह से उनका नाम सुर्खियों में आ गया है।

दरअसल, सुरेंद्रन के खिलाफ 242 आपराधिक मामले दर्ज हैं। जिसमें से 222 मामले केवल सबरीमाला से संबंधित हैं। भाजपा के मुखपत्र जन्मभूमि में उन्होंने इन आपराधिक मामलों के बारे में ब्योरा दिया है।

जिसमें चार पेज लग गए। पार्टी को अपने टीवी चैनल जनम टीवी पर सुरेंद्रन के आपराधिक मामलों का ब्योरा देने में 60 सेकेंड का समय लगा। जबकि अन्य उम्मीदवारों के बारे में ब्योरा देने में केवल सात सेकेंड का समय लगा।

पार्टी के एक आधिकारिक सूत्र ने बताया, ‘यदि किसी दूसरे अखबार के केवल एक संस्करण में उनके ब्योरे के बारे में विज्ञापन दिया जाता तो उसका खर्च करीब 60 लाख रुपये आता। टीवी पर इसका खर्च और ज्यादा आता।’

चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने खिलाफ लंबित मामलों के बारे में प्रिंट और टीवी पर तीन बार विज्ञापन दें।

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