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मप्र में अध्यापकों के ‘शिक्षक’ बनने का सपना रहा अधूरा

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भोपाल, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)| मध्यप्रदेश में अध्यापकों के शिक्षक बनने का सपना अधूरा रह गया, राज्य सरकार ढाई लाख अध्यापकों कई माह से लुभाती आई और शिक्षा विभाग में संविलियन का लॉलीपॉप दिखाती आई, मगर अध्यापकों के हाथ खाली ही रहे। आचार संहिता लागू होने के कारण अध्यापकों के शिक्षा विभाग में संविलियन की प्रक्रिया रोक दी गई है। राज्य सरकार ने 30 सितंबर तक अध्यापकों के शिक्षा विभाग में संविलियन (मर्ज) करने का फैसला लिया था, मगर यह समय पर नहीं हो पाया। छह अक्टूबर को आचार संहिता लागू हो गई, राज्य की लोक शिक्षण आयुक्त जयश्री कियावत ने मंगलवार शाम को एक आदेश जारी कर संविलियन की प्रक्रिया पर रोक लगा दी।

आयुक्त कियावत ने संयुक्त संचालक, जिला शिक्षाधिकारियों को आदेश जारी कर कहा है कि छह अक्टूबर को प्रदेश में विधानसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है, भर्ती अधिनियम-2015 के अंतर्गत अध्यापक संवर्ग के व्यक्तियों की नवीन शैक्षणिक संवर्ग में नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से स्थगित की जाती है।

आयुक्त के इस आदेश से प्रदेश के ढाई लाख अध्यापकों का शिक्षक बनने का सपना अधूरा रह गया। अध्यापकों में सरकार के रवैए को लेकर खासी नाराजगी है, हर तरफ से सवाल उठ रहे हैं कि सरकार की संविलियन की जब मंशा ही नहीं थी तो क्यों उन्हें बीते कई सालों से लुभाया जा रहा था। अध्यापक अपने को छला महसूस कर रहे हैं।

वर्तमान में अध्यापक नगरीय निकाय और पंचायतों के अधीन आते हैं, यह शिक्षा विभाग के कर्मचारी नहीं है। राज्य सरकार ने अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन कर उन्हें शिक्षक बनाने का ऐलान किया था, मगर घोषणा पूरी नहीं हो पाई।

 

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कलाकार के तौर पर सभी भाषाओं के लिए तैयार हूं : आशीष विद्यार्थी

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 नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)| राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता आशीष विद्यार्थी ने हिंदी, तेलुगू, मलयाली और बांग्ला जैसी भाषाओं में सैकड़ों फिल्में की हैं लेकिन उनके अंदर का अभिनेता अभी शांत नहीं हुआ है।

  उन्हें यह भी लगता है कि बॉलीवुड में उनके पास कम अवसर हैं।

कुछ सप्ताह पहले फिल्मकार विशाल भारद्वाज ने कहा था कि बॉलीवुड ने आशीष की प्रतिभा के साथ न्याय नहीं किया है और उन्हें बहुत कमतर आंका गया है और उनसे उनकी क्षमता से कम लिया गया है।

आशीष ने हंसते हुए कहा, “मैं (भारद्वाज से सहमत) हूं।”

उन्होंने आईएएनएस को फोन पर दिए साक्षात्कार में कहा, “कई किरदार हैं और मुझे उनमें से कोई भी करने का अवसर नहीं मिला है। मैं मजाक में लोगों से कहता हूं, ‘कभी-कभी मैं सोचता हूं कि क्या फिल्म उद्योग मेरे मरने का इंतजार कर रहा है और बाद में कहें कि बुरा हुआ। वह अच्छा अभिनेता था। उसे कमतर आंका गया और उसे पर्याप्त मौके नहीं मिले।”‘

वे फिल्म निर्माताओं को बताना चाहते हैं कि वे यहीं हैं।

‘अलीगढ़’ के अभिनेता ने कहा, “कई किरदार हैं और मैं निर्देशकों का इंतजार कर रहा हूं। कलाकार उपस्थित है।”

वे हिंदी फिल्म उद्योग में 90 के शुरुआती दशक से हैं और वे मानते हैं कि उन्होंने सशक्त किरदारों के लिए अपनी प्रतिभा और भूख को जिंदा रखा है।

एक यात्री से अपनी तुलना करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने अन्य भाषाओं में 200 से ज्यादा फिल्में की हैं।”

उन्होंने कहा, “मेरी यात्रा के समय को धन्यवाद, जो कई अन्य भाषाओं ने मेरी खोज की। मैं उनका प्रतिनिधित्व करता हूं। मैंने अपना ज्यादातर सफर तय कर लिया है। मैं भाषाओं से परे एक कलाकार के तौर पर उपलब्ध हूं। मैं मजेदार किरदार की प्रतीक्षा में हूं. हिदी में भी।”

विद्यार्थी को ‘द्रोह काल’, ‘1942 : ए लव स्टोरी’, ‘अर्जुन पंडित’, ‘वास्तव : द रिएलिटी’ और ‘कहो ना.. प्यार है’ जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है।

तीन दशक के अपने अभिनय करियर से खुश होने के सवाल पर उन्होंने कहा, “मैं आभारी हूं और आगे भी तैयार हूं। एक कलाकार की यात्रा चलती रहती है।”

वे फिलहाल अभिनेत्री अमाला पॉल के साथ अपनी तमिल फिल्म की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं।

अभिनय के अलावा वे खुद को प्रेरक वक्ता के तौर पर भी व्यस्त रखते हैं।

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