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Uttarakhand : भारत और अमेरिका के बीच अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त युद्धाभ्यास शुरू

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देहरादून: उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में भारत और अमेरिका का संयुक्त युद्धाभ्यास शुरू हो गया है। यह युद्धाभ्यास 15 दिनों तक चलेगा।  प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार  रक्षा सहयोग एवं सामरिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए भारत और अमेरिका के बीच “संयुक्त युद्ध अभ्यास 2018′  उत्तराखंड राज्य के रानीखेत स्थित चौबटिया क्षेत्र में रविवार से प्रारम्भ हो गया है। पहली बार इस युद्धाभ्यास को डिवीजन हेडक्वार्टर स्तर तक उच्चीकृत किया गया है। इस सैन्य अभ्यास के आरंभ में सबसे पहले भारत और अमेरिका के ध्वजारोहण के साथ दोनों देशों का राष्ट्रगान हुआ।

इस युद्धाभ्यास में भारत और अमेरिका के 350-350 सैनिक युद्ध की आधुनिक उपकरणों का प्रशिक्षण ले रहे हैं।

लगभग दो हफ्ते तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास में आतंकवाद सहित विभिन्न चुनौतियों से निपटने की रणनीतियों पर कार्य किया जाएगा। आतंकवाद से निपटने में यह युद्धाभ्यास मील का पत्थर साबित होगा। इस दौरान दोनों देशों के सैनिकों को एक दूसरे के अनुभवों को साझा करने का अवसर भी प्राप्त होगा।

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इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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