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बाबा रामदेव ने 35 रुपए लीटर पेट्रोल बेचने का निकाला फॉर्मूला, सरकार से मांगी इजाजत

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नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत को लेकर योगगुरु बाबा रामदेव केंद्र सरकार से खासे नाराज दिख रहे हैं। एनडीटीवी के युवा कार्यक्रम में रामदेव ने दावा किया कि अगर केंद्र सरकार उन्हे इजाज़त दे तो वह पेट्रोल-डीजल के दाम को 35 रुपए तक लाकर आम लोगों को राहत दिला सकते हैं।

बाबा रामदेव

मौजूदा समय में देश में बिक रहे 90 रु प्रति लीटर पेट्रोल को 35 रु करने का दावा करते हुए रामदेव ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के न्यूनतम दर यानि 5 फीसद वाले स्लैब में रखा जाना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान रामदेव ने बताया कि अगर पेट्रोल डीजल के दाम को 28 फीसद वाले स्लैब में रखा गया तो आम आदमी को फायदा नहीं हो पाएगा।

कार्यक्रम में रामदेव ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर तेल के दाम घटाने से सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है तो सरकार को देश के बड़े उद्योगपतियों से ज्यादा टैक्स वसूल कर इसकी भरपाई करनी चाहिए।

गौरतलब है कि यदि मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में महज 1 रुपये की कटौती करे तो केन्द्रीय राजस्व को 14,000 करोड़ रुपये का नुकसान होता है।

इस नुकसान से केन्द्र सरकार के लिए वित्तीय घाटा को जीडीपी के 3.3 फीसदी के लक्ष्य पर रखना नामुमकिन हो जाएगा। केन्द्र सरकार इस समय पेट्रोल पर 19.48 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 15.33 प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है।

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मंदिर का सुरक्षा गार्ड या पुलिस, किसके हिस्से में जाएंगे पांच लाख

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कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिस वालों का हत्यारा विकास दुबे मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार कर लिया गया है। सात दिनों तक पुलिस से आंख मिचौली का खेल खेल रहा विकास दुबे आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ ही गया। अब सभी की नजरें उस इनामी राशि पर टिक गई हैं जो विकास दुबे को पकड़ने वाले को मिलने वाली थी।

विकास दुबे पर पहले 25 हजार का इनाम था, जिसको बढ़ाकर 50 हजार, फिर 1 लाख और फिर 2.5 लाख किया गया था। इसके बाद विकास दुबे पर इनामी राशि बढ़कर पांच लाख कर दी गई थी। अब सवाल ये उठता है है कि ये पांच लाख रु मंदिर के उस गार्ड को मिलेंगे जिसने विकास दुबे को सबसे पहले पहचाना था या फिर उज्जैन पुलिस जिसने उसे गिरफ्तार किया।

मंदिर परिसर की ओर से देखा जाए तो सवाल यह उठ रहा है कि अगर सुरक्षाकर्मियों ने ध्यान नहीं दिया होता तो शायद विकास वहां से भी भाग निकलता। इनामी राशि मध्यप्रदेश पुलिस को भी दी जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो मंदिर परिसर का सवाल करना भी वाजिब होगा। हालांकि इसमें पुलिस का पक्ष भी अपने आप में मजबूत है कि अगर पुलिस चौकन्नी नहीं रहती तो मंदिर परिसर द्वारा दी गई सूचना के बावजूद विकास फरीदाबाद की तरह वहां से भी भाग सकता था।

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