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उत्तराखंड

कैंसर को भी चुटकी में ठीक कर सकता है ‘ब्रह्मकमल’ जानिए इस फूल की खासियत

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ब्रह्मकमल का नाम वैसे तो इस ऋष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी के नाम पर पड़ा है। लेकिन इस फूल के कई पौराणिक पहलू भी है। ब्रह्मकमल भगवान शिव का पसंदीदा फूल है। यह उत्तराखंड का राजकीय पुष्प भी है। पर्वती क्षेत्रों के लोगों का मानना है कि यह फूल लोगों के इलाज के लिए बेहद कारगर औषधी है। इस फूल को सूखाकर इसे कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने की दवाओं में प्रयोग किया जाता है।

 

यह फूल अधिकतर चीन व कैलाश घाटी के पास देखने को मिलता है। भारत में लोग इसे हिमाचल में दूधाफूल के नाम से जानते हैं, तो उत्तराखंड में ब्रह्मकमल के नाम से इस फूल को पुकारा जाता है।

उत्तराखंड में यह पुष्प फूलों की घाटी, बुग्याल, तुंगनाथ, चोपटा, रूपकुंड, बदरीनाथ और केदारनाथ जैसे क्षेत्रों में पाया जाता है। वनस्पति शास्त्र के मुताबिक ब्रह्मकमल की 30 से अधिक प्रजातियां इस पृथ्वी पर पाई जाती हैं। यह फूल जुलाई से अक्टूबर के बीच खिलता है और इसी समय केदारनाथ, हेमकुंड साहिब और बद्रीनाथ के कपाट भी भक्तों के लिए खोले जाते हैं। यह फूल आधी रात में खिलता है और सुबह होते ही इसका मुख्यभाग बंद हो जाता है।

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Uttarakhand : संसद में कानून बनाकर राम मंदिर का होना चाहिए था निर्माण: प्रवीण तोगड़िया

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देहरादून : 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले देश में राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर से गर्म होता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.प्रवीण तोगड़िया ने कहा संसद में कानून बनाकर राम मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए था, लेकिन चार वर्ष का समय बीतने के बाद भी राम मंदिर को लेकर कोई ठोस शुरुआत नहीं की गई।

जागरण में छपी  खबर के अनुसार दिल्ली से हल्द्वानी जाते समय रुद्रपुर पहुंचने पर तोगड़िया का इंदिरा गांधी चौक में जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान तोगड़िया ने कहा देश के हिंदुओं ने मोदी को सत्ता पर बैठाया। जनता को विश्वास था कि अयोध्या में राम मंदिर बनेगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा, पेट्रोल के दाम कम होंगे, पर किसी को कुछ नहीं मिला।

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