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पाकिस्तान के लिए शुभ नहीं हैं इमरान, पीएम बनते ही देश को हुआ 36 सौ करोड़ का घाटा

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नई दिल्ली। ऐसा लगता है पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान खान देश के लिए लकी नहीं हैं। उनके प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद ही अमेरिकी सेना ने कहा है कि वह पाकिस्तान को दी जाने वाली 30 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद रद्द कर रहा है। कारण बताते हुए अमेरिका ने कहा कि चूंकि पाकिस्तान आतंकवादी गुटों के खिलाफ कार्रवाई करने में असफल रहा है इसलिए हम उसे दी जाने वाली आर्थिक मदद रद्द कर रहे हैं।

बीबीसी के मुताबिक, पेंटागन के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल कोनी फॉकनर ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी सेना का उद्देश्य इस धनराशि का उपयोग आवश्यक प्राथमिकताओं पर करेगा। फॉकनर ने कहा, हम लगातार पाकिस्तान पर सभी आतंकवादी गुटों के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बनाते रहे लेकिन पाकिस्तान ने कुछ नहीं किया। हम इस 30 करोड़ डॉलर की धनराशि को रद्द कर रहे हैं और इसका इस्तेमाल अन्य जरूरी कार्यो पर करेंगे।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से मिलने के लिए इस्लामाबाद पहुंचने वाले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी पाकिस्तान पर धोखा देने के आरोप लगाते रहे हैं।

(इनपुट- IANS/ एडिट- Aaj ki Khabar)

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कारगिल युद्ध में हमारे फौजियों के पास नहीं थे हथियार, बिना खाने के युद्ध में झोंका गया: नवाज शरीफ

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने कारगिल युद्ध को लेकर कादि चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। शरीफ ने कहा कि साल 1999 में हुए भारत-पाकिस्तान के बीच करगिल युद्ध के पीछे की वजह कुछ जनरल थे, नाकि पाकिस्तानी सेना। शरीफ ने कहा कि इस दौरान उनके सैनिकों के पास हथियार भी नहीं थे।

नवाज शरीफ ने कहा कि करगिल युद्ध, जिसमें हमारे कई जवानों की मौत हुई और दुनिया के सामने पाकिस्तान बदनाम हुआ, उसके पीछे सेना का हाथ नहीं था, बल्कि कुछ जनरल जिम्मेदार थे। उन्होंने न सिर्फ सेना, बल्कि देश और पूरे समुदाय को यु्द्ध में ऐसी जगह झोंक दिया, जहां से कुछ भी नहीं हासिल हुआ।

उन्होंने कहा, ”वह पल मेरे लिए काफी अफसोसजनक था, जब मुझे मालूम हुआ कि हमारे जवानों को बिना भोजन के चोटियों पर भेज दिया गया। यहां तक कि उनके पास हथियार भी नहीं थे। उन्हें अपने जिंदगी से हाथ धोना पड़ा। लेकिन देश और समुदाय को इससे क्या मिला?”

शरीफ ने कहा कि जो जनरल करगिल युद्ध के पीछे थे, उन्होंने अपने कार्यों को छिपाने और सजा से बचने के लिए मार्शल लॉ घोषित कर दिया। परवेज मुशर्रफ और उनके साथियों ने सेना को व्यक्तिगत फायदे के लिए इस्तेमाल किया और उन्हें अपमानित किया।

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