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कश्‍मीर में हाई अलर्ट, पुलिस वालों के रिश्‍तेदारों को उठा ले गए आतंकी

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जम्मू-कश्मीर में आतंकी अशांति फैलाने के अपने मकसद को कामयाब करने के लिए हर हद को पार कर रहे हैं। अभी हाल में ही आतंकी संगठन ने आम नागरिक और सेना को निशाना बनाने के बाद उनके निशाने पर पुलिसकर्मियों के घरवाले और रिश्तेदार आ गए हैं। बता दें कि पिछले 24 घंटे में कुल नौ लोगों को अगवा किया गया है। जबकि पिछले दो दिनों में ये दसवां किडनैप है।

अगवा किए गए सभी लोग अलग-अलग पुलिसकर्मियों के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों के पारिवारिक सदस्यों का अपहरण होने के बाद अब सेना बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाकर इनकी तलाश में जुटी हुई है।

  1. जुबैर अहमद भट्ट, पुलिसकर्मी मोहम्मद मकबूल भट्ट के बेटे।
  2. आरिफ अहमद, एसएचओ नाजिर अहमद के भाई।
  3. फैज़ान अहमद, पुलिसकर्मी बशीर अहमद के बेटे।
  4. सुमैर अहमद, पुलिसकर्मी अब्दुल सलाम के बेटे।
  5. गौहर अहमद, डीएसपी एज़ाज के भाई।
  6. डीएसपी मोहम्मद शाहिद का भतीजा अगवा।
  7. पुलवामा से एक पुलिसवाले के भाई को अगवा किया गया।
  8. पुलिसवाले के बेटे को काकापोरा से।
  9. त्राल से भी एक पुलिसवाले के बेटे को अगवा किया गया।

आपको बता दें कि एक तरफ आतंकियों ने दस लोगों को अगवा किया है तो दूसरी तरफ सुरक्षाकर्मियों ने दस आतंकियों की हिटलिस्ट भी जारी कर दी। इनमें घाटी के टॉप आतंकी शामिल हैं।

घटना की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि आंतकवादियों ने कम से कम पांच लोगों को शोपियां, कुलगाम, अनंतनाग और अवंतिपोरा से अगवा किया है। इसी घटना में गांदरबल जिले से अगवा किए गए पुलिसकर्मी के पारिजन को आंतकवादियों के बुरी तरह पिटाई करने के बाद छोड़ दिया है।

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मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन बोले-बाबर ने बनवाया था मंदिर

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नई दिल्ली। अयोध्या जमीन विवाद मामले की सुनावाई के 28वें दिन मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने अदालत में बाबरनामा का हवाला दिया।

राजीव ने कहा कि वहां मंदिर ही बाबर ने बनाया था। उन्होंने कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि हिन्दू पक्षकार तो गजेटियर का हवाला अपनी सुविधा के मुताबिक दे रहे हैं, लेकिन गजेटियर कई अलग अलग समय पर अलग नजरिये से जारी हुए थे। लिहाजा सीधे तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि बाबर ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई।

राजीव धवन ने कहा कि जस्टिस अग्रवाल के इस विचार से भी इत्तेफाक नहीं रखता, जो कहीं रिपोर्ट को मान रहे हैं और कहीं नहीं। इस पर जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि कई पुरानी मस्जिदों में संस्कृत में भी कुछ लिखा हुआ मिला है। वो कैसे?

जज के सवाल का जवाब देते हुए राजीव धवन ने कहा कि क्योंकि बनाने वाले मजदूर कारीगर हिंदू होते थे तो वे अपने तरीके से इमारत बनाते थे।

बनाने का काम शुरू करने से पहले वो विश्वकर्मा और अन्य तरह की पूजा भी करते थे और काम पूरा होने के बाद यादगार के तौर पर कुछ लेख भी अंकित करते थे।

 

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