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सोशल मीडिया पर अफवाहों के फैलने से वॉट्सएप भी हुआ परेशान, विज्ञापन देकर बताया बचाव के तरीके!

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नई दिल्ली। कुछ सालों में लगातार बढ़ती चली जा रही मॉब लिंचिंग का बहुत हद तक जिम्मेदार सोशल मीडिया भी है। सोशल मीडिया पर अफवाहें आग की तरह फैलती हैं जिसकी वजह से लोगों को भीड़ के गुस्से का सामना करना पड़ता है।

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मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं से वॉट्सएप भी खासा परेशान है। इन अफवाहों को रोकने के लिए वॉट्सएप ने पहल की है। आपको बता दें कि मोदी सरकार ने भी वॉट्सएप को कुछ दिनों पहले निर्देश दिया था कि अफवाहों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए। जिसके बाद वॉट्सएप ने अखबारों में विज्ञापन देकर 10 प्वाइंट्स बताए जिससे लोग अफवाहों से बच सकते हैं।

 ये हैं वो 10 प्वाइंट्स…

  1. अग्रेषित (फॉरवर्ड) किए गए संदेशों से सावधान रहें

  2. ऐसी जानकारी के तथ्यों पर सवाल उठाएं जो आपको परेशान करती है

  3. ऐसी जानकारी की जांच करें जिसपर यकीन करना कठिन हो

  4. ऐसे संदेशों से बचें जो थोड़े अलग दिखते हैं

  5. संदेशों में मौजूद फोटो को ध्यान से देखें

  6. लिंक की भी जांच करें

  7. अन्य स्रोतों का उपयोग करें

  8. सोच समझकर संदेशों को साझा करें

  9. आप जो देखना चाहते हैं उसे नियंत्रित कर सकते हैं

  10. झूठी खबरें अक्सर फैलती हैं

ऑफ़बीट

वॉट्सऐप पर आए ये मैसेज तो तुरंत कर दें डिलीट, वरना बैंक अकाउंट हो जाएगा खाली!

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नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। मैसेज में दावा किया जा रहा है कि 10 साल पूरे होने पर वॉट्सऐप अपने यूजर्स के लिए 1000 जीबी डेटा फ्री दे रहा है।

मैसेज के साथ एक लिंक भी दिया जा रहा जिसपर क्लिक करके 1000 जीबी डेटा क्लेम करने की बात कही जा रही है। आपको बता दें कि मैसेज के दिया गया लिंक फर्जी है और इसका डोमेट ऑफिशियल से बिलकुल अलग है।

लिंक का क्लिक करते ही आपकी पर्सनल डिटेल थर्ड पार्टी के पास जा सकती है। इसके अलावा इस लिंक के जरिए आपके फोन में एप इंस्टॉल करवाकर बैंक डीटेल ली जा सकती है और आपके साथ धोखाधड़ी हो सकती है।

ऐसे में इस लिंक पर क्लिक करना खतरे से खाली नहीं है। वॉट्सऐप ने भी आधिकारिक रूप से मैसेज में किए गए दावों को खारिज कर दिया है। कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा है कि कंपनी यूजर्स को कोई फ्री डेटा नहीं दे रही है।

कंपनी का कहना है कि इस मैसेज पर भरोसा ना करें और लिंक पर क्लिक करके अपनी कोई जानकारी ना दें। welivesecurity के शोधकर्ताओं के मुताबिक अभी तक इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिला है कि हैकर्स इस मैसेज के साथ दिए जा रहे लिंक के जरिए फोन में वायरस इंस्टॉल करवा रहे हैं, लेकिन आपके लिए जरूरी है कि आप किसी भी तरह की अपनी कोई निजी जानकारी इसके साथ साझा ना करें।

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