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सोनाली के कैंसर की खबर सुनते ही सबसे पहले ये सितारा पहुंचा न्यूयॉर्क, सबसे महंगी फिल्म की कर रहा था शूटिंग

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मुंबई “किसी के इश्क में दुनिया भुला दूं…. हो नहीं सकता, हो नहीं सकता”, इन लाइनों को सुनकर एक खूबसूरत चेहरा आंखों आता है, नाम सोनाली बेंद्रे। लगता है इन दिनों बॉलीवुड के सितारे गर्दिश में चल रहे हैं। फिल्म अभिनेता इरफान खान के कैंसर से पीड़ित होने के बाद अब बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे की भी कैंसर से पीड़ित होने की खबर आ रही है। सोनाली ने इस बात खुलासा खुद अपने ट्व‍िटर अकाउंट किया है। आपको बता दें कि इस समय न्यूयॉर्क में कैंसर का चल करा रही हैं।

सोनाली की इस बीमारी के पता चलने के बाद हर किसी को उनकी काफी चिंता होने लगी है। हर कोई उन्हें ट्विटर पर उनकी जल्द ठीक होने की कामना कर रहा है। इसी बीच अक्षय कुमार सोनाली से मिलने सीधा न्यूयॉर्क पंहुच गए, जहां सोनाली का इलाज चल रहा है। अक्षय और सोनाली पिछले काफी सालो से एक-दूसरे के काफी अच्छे दोस्त भी रहे है। इसी वजह से जब अक्षय को उनकी बिमारी के बारे में पता चला तो वो सीधा उनके पास ही पंहुच गए। अक्षय ने सोनाली के लिए उनके ठीक होने की दुआ मांगी है और कहा है कि सोनाली एक बहुत ही हिम्मत वाली इंसान है, जो ऐसी स्थिति से निपटना अच्छी तरह जानती है।

सोनाली की बात करें तो उन्होनें अपने ट्वीटर अकाउंट से कैंसर के बारे में अपने फैंस को बताया था। इसके साथ ही सोनाली ने बताया था कि उन्हें चौथी स्टेज का कैंसर है, जिसके इलाज के लिए वो न्यूयॉर्क जा रही है। सोनाली के लिए आज पूरा बॉलीवुड और हिंदी सिनेमा से जुड़ा हर दर्शक दुआ कर रहा है।

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घर के अंदर वायु प्रदूषण से भी हो सकता है फेफड़ों को खतरा

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घर के अंदर का वायु प्रदूषण दीर्घकाल में फेफड़े को नुकसान पहुंचाता है और यह सीओपीडी के जोखिम का एक कारक है। सीओपीडी एक ऐसी बीमारी है, जो समय के साथ विकसित होती है, और इसके पीछे धूम्रपान और केमिकल्स का विशेष योगदान होता है। कुछ लोगों को आनुवंशिक रूप से सीओपीडी हो जाता है। इस स्थिति से पीड़ित पांच प्रतिशत लोगों में अल्फा-1-एंटीट्रिप्सिन नामक एक प्रोटीन की कमी होती है, जो फेफड़ों को खराब कर देता है और यकृत को भी प्रभावित कर सकता है।

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सीओपीडी के कुछ सामान्य संकेतों और लक्षणों में सामान्य खांसी या बलगम वाली खांसी, सांस की तकलीफ, खासकर शारीरिक गतिविधि के समय, सांस लेने के दौरान घरघराहट या सीटी जैसी आवाज आदि शामिल हैं।

क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के लिए सबसे प्रभावी और निवारक थेरेपी है तम्बाकू के धुएं से बचाव। दवा में ब्रोंकोडाइलेटर्स शामिल हैं, जो एयर पाइप के चारों ओर की मांसपेशियों को आराम देते हैं। ये वायुमार्ग को खोलने के साथ-साथ सांस लेने में आसानी पैदा करते हैं। सर्जरी आमतौर पर अंतिम उपाय होता है।

भारत में लगभग 5.5 करोड़ लोग फेफड़ों की पुरानी अवरोधक बीमारी से पीड़ित हैं, और देश में मृत्यु दर के पांच प्रमुख कारणों में से तीन गैर-संक्रमणीय बीमारियां हैं और सीओपीडी मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण है।क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और एम्फिसेमा समेत फेफड़ों की निरंतर बढ़ने वाली सूजन की बीमारियों का वर्णन करने के लिए एक शब्द है- सीओपीडी, जो एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य खतरा है।

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