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उड़ती फ्लाइट में ही धोनी ने पांड्या के साथ वो किया जो सिर्फ धोनी ही कर सकते हैं

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नई दिल्ली। भारतीय टीम इस समय इंगलैड के दौरे पर है। लेकिन इंगलैड के साथ अपनी श्रृंखला शुरू होने से पहले भारतीय टीम 2 टी-20 मैच खेलने के लिए आयरलैंड रवाना हो चुकी है। आयरलैंड के अपने सफर के दौरान उड़ती फ्लाइट में ही हार्दिक पांड्या सभी का बारी-बारी इंटरव्यू लेने लगे। इंटरव्यू लेते-लेते जब वो धोनी के पास पहुंचे तो धोनी ने बता दिया कि क्यों उन्हें आखिर ‘श्रीमान ठंडा’ यानी ‘Mr. Cool’कहा जाता है।

भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर एक वीडियो शेयर किया। जिसमे हार्दिक पंड्या, बाकि सभी प्लेयर्स के साथ कुछ बातचीत और मस्ती करते नज़र आ रहें हैं। भारतीय टीम के लिए लोकेश राहुल का यह पहला इंग्लैंड टूर है, ऐसे में हार्दिक और विराट ने राहुल के बारे में भी खूब बातें की। सभी प्लेयर्स फ्लाइट में मूवीज देख रहे थे लेकिन हार्दिक एक माइक्रोफोन लेकर सभी का इंटरव्यू बना रहे थे।

सभी खिलाड़ियों से एक एक करके क्वेश्चन पूछते पूछते हार्दिक पंड्या धोनी के पास पहुंचते है और जैसे ही बोलते है हाय माहि भाई वैसे ही धोनी उनके हाथ में एक चिप्स पकड़ा देते है और आगे बढ़ने का इशारा करते है। इस मोमेंट के बाद खुद धोनी भी काफी जोड़ जोड़ से हसने लगते है।

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घर के अंदर वायु प्रदूषण से भी हो सकता है फेफड़ों को खतरा

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घर के अंदर का वायु प्रदूषण दीर्घकाल में फेफड़े को नुकसान पहुंचाता है और यह सीओपीडी के जोखिम का एक कारक है। सीओपीडी एक ऐसी बीमारी है, जो समय के साथ विकसित होती है, और इसके पीछे धूम्रपान और केमिकल्स का विशेष योगदान होता है। कुछ लोगों को आनुवंशिक रूप से सीओपीडी हो जाता है। इस स्थिति से पीड़ित पांच प्रतिशत लोगों में अल्फा-1-एंटीट्रिप्सिन नामक एक प्रोटीन की कमी होती है, जो फेफड़ों को खराब कर देता है और यकृत को भी प्रभावित कर सकता है।

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सीओपीडी के कुछ सामान्य संकेतों और लक्षणों में सामान्य खांसी या बलगम वाली खांसी, सांस की तकलीफ, खासकर शारीरिक गतिविधि के समय, सांस लेने के दौरान घरघराहट या सीटी जैसी आवाज आदि शामिल हैं।

क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के लिए सबसे प्रभावी और निवारक थेरेपी है तम्बाकू के धुएं से बचाव। दवा में ब्रोंकोडाइलेटर्स शामिल हैं, जो एयर पाइप के चारों ओर की मांसपेशियों को आराम देते हैं। ये वायुमार्ग को खोलने के साथ-साथ सांस लेने में आसानी पैदा करते हैं। सर्जरी आमतौर पर अंतिम उपाय होता है।

भारत में लगभग 5.5 करोड़ लोग फेफड़ों की पुरानी अवरोधक बीमारी से पीड़ित हैं, और देश में मृत्यु दर के पांच प्रमुख कारणों में से तीन गैर-संक्रमणीय बीमारियां हैं और सीओपीडी मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण है।क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और एम्फिसेमा समेत फेफड़ों की निरंतर बढ़ने वाली सूजन की बीमारियों का वर्णन करने के लिए एक शब्द है- सीओपीडी, जो एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य खतरा है।

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