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ऑफ़बीट

कौन था दिव्या भारती का पति, जिसके इशारों पर आज सलमान से लेकर वरूण धवन तक नाच रहें हैं?

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मुंबई। जब कोई चीज़ मर जाती है तो उसके प्रति अतिरिक्त लगाव हो जाता है। ऐसा ही कुछ लगाव हमारा है दिव्या भारती के साथ। 90 का दशक, ढेरों सफल फिल्में और एक चेहरा, राष्ट्रीय प्यार का अगर कोई जीता-जागता उदाहरण हो सकता तो वो दिव्या भारती हीं होतीं। कई लोग उन्हें कुंवारी बताते हैं तो कई लोग उनकी मौत के पीछे उनके पति का हाथ बताते हैं। लेकिन कोई नहीं जानता कि उनका पति कौन था और अब वो कहां हैं? आज हम आपको बताएंगे दिव्या भारती के पति के बारे में।

 

साल 1992 में शाहरुख खान की फिल्म ‘दीवाना’ से बॉलीवुड में कदम रखने वाली दिव्या के पति का नाम है साजिद नाडियाडवाला। साजिद और दिव्या ने 10 मई 1992 को शादी की थी। शादी से पहले और शादी के बाद दिव्या अपने पति साजिद से खूब प्यार करती थी। लेकिन, साजिद की तक़दीर में दिव्या का प्यार ज्यादा समय के लिए नहीं था।

कहा जाता है कि साल 1993 में अपने घर की बालकनी से गिर जाने की वजह से उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। जिसके बाद साजिद भी सदमे में चले गए थे। सदमे से निकलने के बाद साजिद ने खुद को दिव्या की याद से दूर करने के लिए नवम्बर 2002 में वर्धा खान से निकाह कर लिया था। साजिद की दूसरी पत्नी वर्धा खान दिखने में बेहद ही खूबसूरत और बोल्ड हैं। आज दोनों दो बेटे सुभान और सुफियान के माता-पिता हैं।

आज साजिद अपने परिवार के साथ हंसी-ख़ुशी जिंदगी काट रहे हैं। साजिद नाडियाडवाला बॉलीवुड के एक जाने-माने और बड़े मशहूर फिल्म प्रोड्यूसर हैं। इन्होंने ‘किक’, ‘जुड़वा’, ‘जुड़वा 2’, और ‘जानेमन’ जैसी कई हिट फिल्मों को प्रोड्यूस किया है।

आध्यात्म

भगवान विष्णु के ये दो अवतार आज भी हैं धरती पर जीवित, जानकर दंग रह जाएंगे आप

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श्रीमद्भागवत के अनुसार भगवान विष्णु ने अब तक 23 अवतार लिए हैं इनमें जिन 10 अवतारों के बारे में हम जानते हैं वो भगवान विष्णु के मुख्य अवतार माने जाते हैं।

भगवान विष्णु के 23 अवतार तो अब तक पृथ्वी पर अवतरित हो चुके हैं, जबकि उनका 24वां अवतार ‘कल्कि अवतार’ के रूप में होना बाकी है। पुराणों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के शंभल नामक स्थान पर विष्णुयशा नामक तपस्वी ब्राह्मण के घर भगवान कल्कि पुत्र रूप में जन्म लेंगे और देवदत्त नामक घोड़े पर सवार होकर संसार से पापियों का विनाश करेंगे और पुन: धर्म की स्थापना करेंगे।

संस्कृत का एक श्लोक है, “अश्वत्थामा बलिव्यासो हनूमांश्च विभीषिण:। कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:।। सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेययाष्टमम्। जीवेद्वर्षशतं सोपिसर्वव्याधि विवर्जित:।।” इसका अर्थ ये है कि अश्वत्थामा, बलि, महर्षि वेदव्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और ऋषि मार्कण्डेय ये आठ लोग संसार में अमर हैं।

हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के दो अवतार धरती पर आज भी जीवित हैं। श्रीमद्भागवत के अनुसार, महर्षि वेदव्यास भगवान विष्णु के 19वें अवतार हैं। वे महाज्ञानी महर्षि पराशर के घर पुत्र के रूप में प्रकट हुए थे। इन्होंने ही मनुष्यों की आयु और शक्ति को देखते हुए वेदों के विभाग किए थे, इसलिए इन्हें वेदव्यास कहा जाता है। पांडव महर्षि वेदव्यास की सलाह पर स्वर्ग की यात्रा की कोशिश की थी।

भगवान विष्णु का दूसरा अवतार जिसे आज भी धरती पर जीवित माना जाता है वो हैं परशुराम। परशुराम विष्णु जी के 18वें अवतार हैं।

इन्हें भगवान विष्णु का 18वां अवतार माना जाता है। अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए परशुराम ने 21 बार धरती से क्षत्रिय को समाप्त कर दिया था।

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