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अगर पुरुष पुनर्विवाह कर सकते हैं, तो महिलाएं पुनर्विवाह क्यों नहीं कर सकती : उपराष्ट्रपति

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उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने आज कहाकि “अगर कोई पुरुष पुनर्विवाह कर सकता है, तो महिला क्यों नहीं कर सकती?”

विधवाओं के प्रति मानसिकता बदलने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस पर एक समारोह में कहा, “लोगों की मानसिकता एक समस्या है, हमें इस मानसिकता को बदलने की जरूरत है।” उन्होंने यह भी कहा कि विधवापन पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए दुखी करने वाला होता है, लेकिन महिलाओं को अधिक पीड़ा उठानी पड़ती है।

अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस पर आयोजित एक समारोह में उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू

यहां विज्ञान भवन में लूमबा फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी उसी प्रकार की भावनाएं व्यक्त की। प्रसाद ने कहा, “विधवाओं के सशक्तिकरण के लिए उठाए गए कदम तब तक सफल नहीं होंगे, जब तक कि इसे जन आंदोलन के रूप में नहीं लिया जाता। रुख में बदलाव के बिना हम ज्यादा कुछ नहीं बदल सकते हैं।”

यह फाउंडेशन दुनियाभर में विधवाओं के लिए काम कर रहा है। इसकी शुरुआत 1997 में लॉर्ड राज लूमबा सीबीई ने की थी। लूमबा ने भारत सरकार से विधवाओं की स्थिति में सुधार के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।

लॉर्ड राज लूमबा ने कहा, “भारत में 4.60 करोड़ विधवाएं हैं, जो किसी भी देश से अधिक है। मैंने भारत सरकार से महिलाओं के लिए राष्ट्रीय आयोग के साथ विधवाओं के लिए राष्ट्रीय आयोग स्थापित करने का आग्रह किया है। मैंने सरकार से अल्पसंख्यक वर्ग में महिलाओं को विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान करने का भी आग्रह किया है।” (इनपुट आईएएनएस)

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सुशांत सिंह राजपूत की मौत की होगी सीबीआई जांच, केंद्र ने स्वीकार की बिहार सरकार की सिफारिश

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नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले की जांच अब सीबीआई करेगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बुधवार को बताया कि भारतीय संघ ने बिहार सरकार द्वारा मामले की सीबीआई जांच का आदेश देने की सिफारिश स्वीकार कर ली है। केंद्र की ओर से पेश हुए मेहता ने न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय के सामने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के लिए अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में सभी पक्षों को अपने-अपने रुख दर्ज करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। यह भी उल्लेख किया कि मुंबई पुलिस को अब तक की जांच के अपने रिकॉर्ड प्रस्तुत करने होंगे।

मामले पर सुनवाई अगले सप्ताह होगी। न्यायमूर्ति रॉय ने कहा, हम जानना चाहते हैं कि मुंबई पुलिस ने अब तक क्या किया है। वहीं महाराष्ट्र सरकार के वकील ने सीबीआई जांच का विरोध करते हुए तर्क दिया कि मामले की जांच का अधिकार मुंबई पुलिस के पास है।

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