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देशभर में मानसून 24 जून से हो जाएगा सक्रिय

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देशभर में 24 जून से मानसून सक्रिय हो सकता है। इस सप्ताह मानसून की चाल बेहद कमजोर रहेगी। मौसम पूर्वानुमानकर्ता स्काइमेट के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की स्थिति कमजोर बनी हुई है। लेकिन 24 जून से मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है।

स्काइमेट ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मैडेन जूलियन ओशीलेशन (एमजेओ) मानसून के अनुकूल हो रहा है और बंगाल की खाड़ी के उत्तरी भागों में मानसून सिस्टम विकसित होने वाला है, जिससे 24 जून से पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के कुछ और भागों तथा ओड़िशा में मानसून प्रभावी हो जाएगा।

स्काइमेट ने अगले 24 घंटे कोंकण क्षेत्र में गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल में बारिश जारी जारी रहने की संभावना जताई है। इन इलाकों में मूसलधार वर्षा हो सकती है। मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ में भी मानसून सक्रिय रहेगा और मध्यम से भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। उत्तरी तेलंगाना, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और दक्षिणी छत्तीसगढ़ में मानसून सामान्य रहेगा और हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जाएगी। गंगीय पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, आंध्र प्रदेश, मराठवाड़ा, आंतरिक कर्नाटक, दक्षिणी तेलंगाना और तमिलनाडु में मानसून कमजोर रहेगा। इन भागों में कम वर्षा के आसार हैं।

बीते 24 घंटों के दौरान गोवा और तटीय कर्नाटक में मानसून काफी सक्रिय रहा और भारी वर्षा हुई। केरल में भी मानसून सक्रिय रहा। मध्य महाराष्ट्र, विदर्भ, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और तेलंगाना के भी कुछ हिस्सों में सामान्य मानसून के बीच हल्की से मध्यम बारिश हुई।

दूसरी ओर ओड़िशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु में मानसून कमजोर रहा और बारिश न के बराबर हुई। (इनपुट आईएएनएस)

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भारतीय वैज्ञानिकों ने रचा इतिहास, चंद्रयान-2 को चांद की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचाया

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नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों ने मंगलवार को चंद्रयान-2 को चांद की पहली कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश करा कर इतिहास रच दिया है।

चांद के ऑर्बिट में चंद्रयान-2 को प्रवेश कराना वैज्ञानिकों के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था। वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती चंद्रयान-2 की गति कम करने की थी जिसे इसरो वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक 10.98 किमी प्रति सेकेंड से 1.98 किमी प्रति सेकेंड कर दिया।

वैज्ञानिकों ने सुबह 8.30 से 9.30 बजे के बीच चंद्रयान-2 को चांद की कक्षा LBN#1 में प्रवेश कराया। अब चंद्रयान-2, 118 किमी की एपोजी (चांद से कम दूरी) और 18078 किमी की पेरीजी (चांद से ज्यादा दूरी) वाली अंडाकार कक्षा में अगले 24 घंटे तक चक्कर लगाएगा।

आपको बता दें कि चंद्रयान-2 की गति 90 फीसदी इसलिए कम की गई है ताकि यान चांद गुरूत्वाकर्षण की वजह से उसके सतह से टकरा न जाए। पहले ऑर्बिट में प्रवेश के बाद 7 सितंबर को चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण केंद्र से रॉकेट बाहुबली के जरिए प्र‍क्षेपित किया गया था।

इससे पहले 14 अगस्त को चंद्रयान-2 को ट्रांस लूनर ऑर्बिट में डाला गया था. उम्मीद जताई जा रही है कि 7 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चंद्रयान-2 की चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग को लाइव देखेंगे।

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