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ऑफ़बीट

सोशल मीडिया ने चाय वाली और गोरमिंट वाली आंटी समेत, इन पांच लोगों की जिंदगी बना दी

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मुंबई। आज के समय में सोशल मीडिया एक ऐसा माध्यम है जिससे किसी को भी आम से खास होने में समय नहीं लगता। पिछले कुछ समय में हमने ऐसे कई उदाहरण देखे हैं जिसमें लोग सोशल मीडिया के माध्यम से रातों-रात स्टार बन गए। चाहे वो मलयालम एक्ट्रेस प्रिय प्रकाश वारियर हों या हाल में अपने डांस से फेमस हुए डांसिंग अंकल। इनकी कामयाबी के पीछे सोशल मीडिया का ही हाथ है। आइये आज हम आपको ऐसे ही कुछ खास लोगों से मिलवाते हैं जो पहले आम थे।

सोमवती महावर

‘हैलो फ्रैंड्स चाय पी लो’ ट्विटर, फे़सबुक, व्हॉट्सएप और न जाने कहां-कहां इन दिनों चायवाली एक भाभी जी के ही वीडियो देखे जा रहे हैं। ये कुछ भी खाने से पहले सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों को ऑफ़र करना नहीं भूलती। इनका नाम सोमवती महावर हैं और पिछले एक हफ़्ते के भीतर ही सोशल मीडिया सनसनी बन गई हैं।

डांसिंग अंकल

एमपी के एक प्रोफ़ेसर संजीव श्रीवास्तव भी इन दिनों इंटरनेट पर छाए हुए हैं। कुछ दिनों पहले 46 वर्षीय प्रोफ़ेसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में वो गोविंदा की फ़िल्म ख़ुदगर्ज़ के सुपरहिट गाने ‘आप के आ जाने से’ पर हूबहू गोविंदा जैसे ही डांस स्टेप करते हुए नज़र आए थे। तब से लेकर अब तक उनके कई वीडियो सामने आ चुके हैं। इन वीडियोज़ की बदौलत ये भी रातों रात स्टार बन गए।

ओमप्रकाश मिश्रा

ओमप्रकाश मिश्रा एक Self Acclaimed Rapper हैं। ये अपने एक गाने ‘ऑन्टी आऊं क्या’ से कुख्यात हुए। हालांकि इनके गाने के बोल बहुत ही वाहियात थे, लेकिन फिर भी लोगों ने इसे जमकर देखा। हद तो तब हो गई जब इनका एक और वाहियात गाना लोगों ने हाथों हाथ लिया।

गोरमिंट आंटी

पाकिस्तान की ये आंटी भी अपनी सरकार को गरियाने और उसके बिक जाने के आरोप को लेकर फ़ेमस हो गई थी। तब से लेकर अब तक लोगों का मन जब भी सरकार लताड़ने का करता है, तो इनके वीडियो का ही इस्तेमाल किया जाता है।

प्रिया प्रकाश वारियर

इनके आंख मारने की अदा लोगों को इतनी भाई कि प्रिया देखते ही देखते प्रसिद्ध हो गई। इस वीडियो से प्रिया ने ख़ूब लाइम लाइट बटोरी पर कुछ लोगों ने इनके खिलाफ एफआईआर कर इनकी परेशानी बढ़ाने का काम भी किया। इनकी लोकप्रियता का आलम आप इसी से लगा सकते हैं कि इंस्टाग्राम पर इनके 6 मिलियन से ज़्यादा फॉलोवर्स हैं।

आध्यात्म

जन्माष्टमी स्पेशल : सिर्फ भगवान ही नहीं, क्यों सबसे महान भी हैं श्री कृष्ण, जानिए पूरी कहानी

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यशोदा नंदन, देवकी पुत्र भारतीय समाज में कृष्ण के नाम से सदियों से पूजे जा रहे हैं। तार्किकता के धरातल पर कृष्ण एक ऐसा एकांकी नायक हैं, जिसमें जीवन के सभी पक्ष विद्यमान है। कृष्ण वो किताब हैं जिससे हमें ऐसी कई शिक्षाएं मिलती हैं जो विपरीत परिस्थिति में भी सकारात्मक सोच को कायम रखने की सीख देती हैं।

कृष्ण के जन्म से पहले ही उनकी मृत्यु का षड्‍यंत्र रचा जाना और कारावास जैसे नकारात्मक परिवेश में जन्म होना किसी त्रासदी से कम नहीं था । परन्तु विपरीत वातावरण के बावजूद नंदलाला, वासुदेव के पुत्र ने जीवन की सभी विधाओं को बहुत ही उत्साह से जीवंत किया है। श्री कृष्ण की संर्पूण जीवन कथा कई रूपों में दिखाई पङती है।

नटवरनागर श्री कृष्ण उस संर्पूणता के परिचायक हैं जिसमें मनुष्य, देवता, योगीराज तथा संत आदि सभी के गुण समाहित हैं। समस्त शक्तियों के अधिपति युवा कृष्ण महाभारत में कर्म पर ही विश्वास करते हैं। कृष्ण का मानवीय रूप महाभारत काल में स्पष्ट दिखाई देता है। गोकुल का ग्वाला, बिरज का कान्हा, धर्म की रक्षा के लिए रिश्तों के मायाजाल से दूर, मोह-माया के बंधनों से अलग है।

कंस हो या कौरव-पांडव, दोनों ही निकट के रिश्ते, फिर भी कृष्ण ने इस बात का उदाहरण प्रस्तुत किया कि धर्म की रक्षा के लिए रिश्तों के बजाय कर्तव्य को महत्व देना आवश्यक है। ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि कर्म प्रधान गीता के उपदेशों को यदि हम व्यवहार में अपना लें तो हम सब की चेतना भी कृष्ण सम विकसित हो सकती है।

कृष्ण का जीवन दो छोरों में बंधा है। एक ओर बांसुरी है, जिसमें सृजन का संगीत है, आनंद है, अमृत है और रास है। तो दूसरी ओर शंख है, जिसमें युद्ध की वेदना है, गरल है तथा निरसता है। ये विरोधाभास ये समझाते हैं कि सुख है तो दुःख भी है।

यशोदा नंदन की कथा किसी द्वापर की कथा नहीं है, किसी ईश्वर का आख्यान नही है और ना ही किसी अवतार की लीला। वो तो यमुना के मैदान में बसने वाली भावात्मक रुह की पहचान है। यशोदा का नटखट लाल है तो कहीं द्रोपदी का रक्षक, गोपियों का मनमोहन, तो कहीं सुदामा का मित्र। हर रिश्ते में रंगे कृष्ण का जीवन नवरस में समाया हुआ है।

माखन चोर, नंदकिशोर के जन्म दिवस पर मटकी फोङ प्रतियोगिता का आयोजन, खेल-खेल में समझा जाता है कि किस तरह स्वयं को संतुलित रखते हुए लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है; क्योंकि संतुलित और एकाग्रता का अभ्यास ही सुखमय जीवन का आधार है। सृजन के अधिपति, चक्रधारी मधुसूदन का जन्मदिवस उत्सव के रूप में मनाकर हम सभी में उत्साह का संचार होता है और जीवन के प्रति सृजन का नजरिया जीवन को खुशनुमा बना देता है।

कृष्ण मथुरा में उत्पन्न हुए, पर राज उन्होंने द्वारका में किया। यहीं बैठकर उन्होंने सारे देश की बागडोर अपने हाथ में संभाली। पांड़वों को सहारा दिया। धर्म की जीत कराई और शिशुपाल और दुर्योधन जैसे अधर्मी राजाओं को मिटाया। द्वारका उस जमाने में राजधानी बन गई थीं। बड़े-बड़े राजा यहां आते थे और बहुत-से मामले में भगवान कृष्ण की सलाह लेते थे। इस जगह का धार्मिक महत्व तो है ही, रहस्य भी कम नहीं है। कहा जाता है कि कृष्ण की मृत्यु के साथ उनकी बसाई हुई यह नगरी समुद्र में डूब गई। आज भी द्वारका में उस नगरी के अवशेष मौजूद हैं।

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