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अमिताभ बच्चन ने घोषित की अपनी वसीयत, 10 अरब की संपत्ति के वारिस अभिषेक नहीं, ये हैं

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मुंबई। “कल जब खेल फिर शुरू होगा, तो मोहरे हम वहीँ से उठाएंगे जहां आज रखे हैं”

अमिताभ बच्चन के मुंह से ये डायलॉग निकलने की देर होती थी और शालीन से शालीन लोग भी कुर्सियों पर खड़े होकर सीटियाँ मारने लगते थे। वही जलवा आज भी कायम है। अमिताभ ही एकलौते ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने अपनी भूमिकाओं और फिल्मों के चयन को समय के साथ बदल लिया है। इसलिए आज भी उनकी फ़िल्में एक अलग दर्जे की होती हैं। अमिताभ की छवि पारिवारिक रूप से भी काफी सफल है। उन्होंने हमेशा अपने परिवार को बंधे रखा है और कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया।

समय-समय पर लोग ये सवाल उठाते रहते हैं कि उनकी विशालकाय संपत्ति का वारिस कौन होगा। आपकी जानकारी बढ़ाते हुए बता देते हैं कि अभिताभ बच्चन के नाम से लंदन, दुबई और पेरिस के बैंकों में कुल 19 अकाउंट हैं। जबकि जया बच्चन के पास 26 करोड़ 10 लाख 99 हजार 543 रुपए की ज्वेलरी हैं। अमिताभ के नाम से मुंबई में दो बंगले जलसा और प्रतीक्षा हैं, जिनकी कीमत क्रमश 100 करोड़ और 115 करोड़ रूपए है। इसके साथ अमिताभ बच्चन के पास कुल 10.01 अरब रुपए की संपत्ति है। जिसमें अमिताभ के पास 8.03 अरब रुपए तथा जया बच्चन के नाम से 1.98 अरब रुपए के नाम से संपत्ति है।

साल 2017 में अमिताभ बच्चन ने एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने लिखा था कि मेरे मरने के बाद मेरी संपत्ति अभिषेक और श्वेता में बराबर बांट दी जाए। अमिताभ बच्चन अक्सर अपनी पत्नी जया बच्चन, बहू ऐश्वर्या राय और पोती आराध्या को संभालते हुए नजर आते हैं। अमिताभ बच्चन ने अपने परिवार में कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया।

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भारत के इस राज्य में तैयार हुआ कोरोना से लड़ने वाला रोबोट, डॉक्टरों में खुशी

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pic - ANI

कोरोना महामारी के बीच एक आशा की खबर सामने आ रही इंजीनीयरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्र ने घर बैठे एक ऐसा रोबोट तैयार किया है ,जो कोरोना महामारी में इन डाक्टरों की मदद तो करेगा ही साथ ही उन्हें इस बीमारी से बचायेगा और कोरोना पीड़ित मरीजों की भी सेवा करेगा।

महासमुंद जिले के गुडरूपारा निवासी इंजीनियरिंग के छात्र योगेश कुमार साहू ने अपने दो मित्रो ( प्रवीण वर्मा और रिषिकेश यादव ) की मदद से बनाया है। योगेश छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद टेक्निकल यूनीर्वसिटी भिलाई का बीई अंतिम वर्ष का छात्र है।

इस रोबोट को बनाने के लिए योगेश ने मेटल शीट, पीवीसी पाइप, लकड़ी, ग्यारह मोटर, माइक्रो फोन ,स्पीकर और इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड का उपयोग किया। रोबोट के आँखो में एलईडी लाईट का उपयोग किया। रोबोट किसी भी चीज को उठाकर एक जगह से दूसरी जगह ले जा सके इसके लिए रोबोट को मोबाईल फोन से कनेक्ट किया।

इस प्रकार रोबोट तैयार हो गया और रोबोट को बनाने में 5 हजार रूपये का खर्च आया। इस रोबोट का उपयोग अस्पतालों में मरीजों की देखभाल में किया जा सकता है,जो कोरोना जैसे बीमारियों से ग्रसित हो। इसका उपयोग कारखानो में मानेटरिंग, आर्मी में, केमिकल स्प्रे में, सुरंग में, न्यूक्लियर प्लांट में एवं लैंड माईन का पता लगाने और बम को निष्क्रिय करने में भी किया जा सकता है।

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