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प्रधानमंत्री पद का दावेदार निकला समलैंगिक, पार्टी के लोगों के साथ बनाता है संबंध!

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नई दिल्ली। इन दिनों एक ऑटोबायोग्राफी ने हर ओर बवाल काट रखा है। इस किताब ने राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तहलका मचा दिया है। पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और नेता इमरान खान की पूर्व पत्नी रेहम खान की ऑटोबायोग्राफी लिख रही है जो रिलीज से पहले ही बवाल मचा रही है।

इस ऑटोबायोग्राफी में इमरान को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक के मुताबिक रेहम की इस किताब के कुछ अंश ऑनलाइन लीक हो गए है जिसके चलते पाकिस्तान की राजनीति में भूचाल आ गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रेहम ने इस किताब में पाकिस्तानी पूर्व कप्तान और तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेता इमरान खान पर समलैंगिक होने का आरोप लगाया है।

रेहम के मुताबिक इमरान ने अपने पार्टी के सदस्यों के साथ संबंध बनाए हैं। आपको बता दें कि रेहम खान की शादी जनवरी 2015 में हुई थी। लेकिन ये शादी ज्यादा दिनों तक नहीं चली और दोनों का अक्टूबर 2015 में तलाक हो गया।

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मुस्लिम देश का वो प्राचीन मंदिर जहां पीएम मोदी ने किए दर्शन

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को इस्लामिक देश बहरीन पहुंचे। इसी के साथ पीएम मोदी इस इस्लामिक देश की यात्रा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं।

अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने रविवार को इस देश के 200 साल पुराने मंदिर में दर्शन किए। बहरीन की राजधानी मनामा में स्थित यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण का है।

200 साल पहले स्थापित किए गए इस मंदिर का नाम  श्रीनाथजी (श्री कृष्ण) मंदिर  है। हाल ही में मंदिर का नवीनीकरण किया गया है। जिसमें 42 लाख डॉलर (करीब 30 करोड़ रुपये) की लागत आई है।

थाटई हिंदू व्यापारी समुदाय के अध्यक्ष बॉब ठाकेर के अनुसार,  45,000 वर्ग फुट क्षेत्र में तीन मंजिला भवन के साथ मंदिर का नवीनीकरण किया जा रहा है। इस मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए 80 फीसदी अधिक क्षमता होगी। हालांकि पहले मंदिर की क्षमता कम थी।

उन्होंने बताया कि “मंदिर एक नॉलेज सेंटर के अलावा मंदिर से जुड़ा एक संग्रहालय भी है। थाटई हिंदू व्यापारी समुदाय के एक प्रमुख सदस्य भगवान असारपोटा ने कहा कि हम भाग्यशाली हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री मंदिर के 200वें स्थापना वर्ष के उत्सव पर यहां का दौरा कर रहे हैं।”

बताया जाता है इस मंदिर की स्थापना 18वीं शताब्दी के दूसरे दशक में थाटई हिंदू व्यापारी समुदाय के लोगों की ओर से की गई थी। इसी समुदाय के लोग आज भी इस मंदिर की देखभाल करते हैं।

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