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आरएसएस मंच से दिए प्रणब मुखर्जी के भाषण से पी. चिदंबरम खुश

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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी आरएसएस के मंच पर जाकर बोले, भाजपा और कांग्रेस सहित कई बड़े दलों के नेताओं ने हल्ला मचा दिया, कुछ ने कहा गलत है तो कुछ ने कहा, ठीक है, आरएसएस की खामियां गिनाई। पर देशभर में इस मामले पर बहस मुबाहिसा हो रहे हैं।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीन वर्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन, यानी तृतीय वर्ष वर्ग को संबोधित करने का न्योता आया और उन्होंने बड़े सहहृदय स्वीकार किया, और उनके मंच से बोले और जमकर बोले। प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत के विभिन्न धर्म और संस्कृति इसे सहिष्णु बनाते हैं और देश की आत्मा इसकी बहुलवाद और धर्मनिरपेक्षता में बसती है।

कांग्रेस के एक बड़े नेता और पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री पी. चिदंबरम

कांग्रेस के एक बड़े नेता और पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने खुशी जताते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आरएसएस के मंच पर जाकर उसकी गड़बड़ विचारधारा के बारे में उसे बताया।

पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री चिदंबरम ने प्रणब मुखर्जी के गुरुवार को नागपुर दौरे पर ट्वीट किया, “इस बात की खुशी है कि प्रणब मुखर्जी ने कांग्रेस की विचारधारा की अच्छाई के बारे में आरएसएस को बताया। यह आरएसएस की विचारधारा में मौजूद गड़बड़ियों गिनाने का उनका तरीका था।”

प्रणब के नागपुर दौरे को लेकर हालांकि कांग्रेस पार्टी की तरफ से काफी विरोध हुआ था, और उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भी उनके इस दौरे का विरोध किया था।

प्रणब का भाषण देश के समसामयिक इतिहास में महत्वपूर्ण घटना : आडवाणी

भाजपा के संरक्षक लाल कृष्ण आडवाणी ने आरएसएस मुख्यालय नागपुर में कार्यक्रम में हिस्सा लेने को उनकी ‘शिष्टता व सद्भाव’ बताया और कहा कि देश के समसामयिक इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण घटना है।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

लाल कृष्ण आडवाणी ने पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी को स्वयंसेवकों को संबोधित करने के लिए निमंत्रण देने के लिए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की भी प्रशंसा की। स्वंयसेवकों ने इस साल अपने प्रशिक्षण का तीन साल पूरा किया है। आडवाणी की यह टिप्पणी प्रणब मुखर्जी के नागपुर में आरएसएस कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के एक दिन बाद आई है।

आडवाणी ने कहा, “दोनों नेताओं द्वारा व्यक्त किए गए विचारों में एक खास सामंजस्य व जीवंतता दिखती है। दोनों ने भारत की आवश्यक एकता को उजागर किया, जो धार्मिक बहुलवाद सहित सभी विविधताओं को स्वीकारते हैं और सम्मान करते हैं।”

लाल कृष्ण आडवाणी गुजरात के गांधीनगर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद हैं। उन्होंने अपने को आरएसएस का आजीवन स्वंयसेवक बताया।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी

सीताराम येचुरी खली आरएसएस मुख्यालय पर गांधी की हत्या का जिक्र न होना

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आरएसएस मुख्यालय में दिए भाषण पर मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि, प्रणब मुखर्जी ने बहुलवाद और बहु-आस्था पर जो कुछ बोला, वे सब बातें लोग भूल जाएंगे, लोगों की स्मृति में बस यही रहेगा कि वह आरएसएस मुख्यालय गए थे।

महासचिव सीताराम येचुरी को यह बात बहुत खली कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आरएसएस मुख्यालय में अपने भाषण में महात्मा गांधी की हत्या का कोई जिक्र नहीं किया।

सीताराम येचुरी ने कहा, “प्रणब दा की बेटी ने बिल्कुल सही कहा है। दृश्य याद रहेंगे, भाषण भुला दिए जाएंगे।”  (इनपुट आईएएनएस)

प्रादेशिक

केरल-पंजाब के बाद अब राजस्थान विधानसभा में भी पास हुआ CAA के खिलाफ प्रस्ताव

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जयपुर केरल, पंजाब के बाद राजस्थान विधानसभा ने भी शनिवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रस्ताव पास कर दिया। इसी के साथ राजस्थान सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पास करने वाला तीसरा राज्य बन गया है।

केरल और पंजाब के बाद ऐसा प्रस्ताव पास करने वाला राजस्थान तीसरा राज्य बन गया है। राजस्थान विधानसभा में सीएए के खिलाफ पेश प्रस्ताव में कहा गया कि संसद द्वारा अनुमोदित सीएए के जरिए धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों को निशाना बनाया गया है।

धर्म के आधार पर ऐसा भेदभाव ठीक नहीं है। यह संविधान की धर्मनिरपेक्ष वाली मूल भावना के खिलाफ है। यही कारण है कि सीएए के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। संकल्प में एनआरसी और असम का भी जिक्र किया गया है।

हालांकि, राजस्थान विधानसभा में सीएए के साथ ही एनपीआर में हुए संशोधनों को लेकर भी संकल्प पास हुआ। राजस्थान पहला राज्य है, जहां एनपीआर के संशोधनों को लेकर कोई संकल्प पास किया गया है।

इसके बाद विधानसभा की कार्यवाही 10 फरवरी सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। शनिवार को जब सदन में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया तो विपक्ष ने विरोध किया।

भाजपा सदस्य वेल में चले आए और सीएए के समर्थन में नारे लगाए। इससे पहले एससी-एसटी आरक्षण को बढ़ाने वाला 126वां संशोधन प्रस्ताव पारित किया गया।

केरल विधानसभा ने 31 दिसंबर 2019 और पंजाब विधानसभा ने 17 जनवरी को नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास किया था।

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