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पटना में ईद-उल-फितर की तैयारियां तस्वीरों में देखें

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पूरे देश में रमजान का पव़ित्र माह चल रहा है। मुस्लिम पुरुष और महिलाएं रोजे रख रखकर अल्लाह की इबादत कर रहे हैं। एक महीने के बाद ईद आती है और सभी के चेहरों पर खुशियां लाती है।

इस ईद को ईद-उल-फितर के नाम से पुकारते है। ईद-उल-फितर पैगम्बर हजरत मुहम्मद के बद्र की लड़ाई फतह करने पर उसकी खुशी में ही यह त्यौहार मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि 624 ईस्वी में पहला ईद-उल-फितर मनाया गया था।

बिहार के शहर पटना में मुस्लिम महिलाएं ईद की खरीदारी कर रही हैं। वैसे तो ईद के आने में काफी समय है। पर खुशी खुशी में कब ईद आई इसका पता नहीं चल पता है। पटना में ईद की खरीदारी करतीं मुस्लिम महिलाएं इन तस्वीरों में देखें।

पटना में ईद-उल-फितर की तैयारियां तस्वीरों में देखें

पटना में ईद-उल-फितर की तैयारियां तस्वीरों में देखें

पटना में ईद-उल-फितर की तैयारियां तस्वीरों में देखें

पटना में ईद-उल-फितर की तैयारियां तस्वीरों में देखें

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श्रमजीवी पत्रकार डॉ. के. विक्रम राव हैं हर एक मीडिया पर्सन के लिए मिसाल

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समाज की सच्ची तस्वीर दिखाना हर एक ईमानदार पत्रकार की ज़िम्मेदारी होती है, ऐसे ही एक श्रमजीवी पत्रकार हैं डॉ. के. विक्रम राव।गद्यकार, सम्पादक, मीडिया शिक्षक और टीवी, रेडियो समीक्षक डॉ. के. विक्रम राव श्रमजीवी पत्रकारों के मासिक दि वर्किंग जर्नलिस्ट के प्रधान सम्पादक हैं।

वे वॉयस ऑफ अमेरिका (हिन्दी समाचार प्रभाग, वाशिंगटन) के दक्षिण एशियाई ब्यूरो में 15 वर्षों तक संवाददाता रहे। वे 1962 से 1998 तक दैनिक टाइम्स ऑफ इण्डिया (मुंबई) में कार्यरत थे।

नौ प्रदेशों में इसके ब्यूरो प्रमुख रहे। सम्प्रति 85 तेलुगु, हिंदी, उर्दू तथा अंग्रेजी पत्रिकाओं में स्तंभकार हैं। वे मुम्बई, हैदराबाद, कोची, दिल्ली, अहमदाबाद, कोलकत्ता आदि के पत्रकारिता संस्थानों में रिपोर्टिंग पर व्याख्याता भी हैं।

वे डॉ. धर्मवीर भारती के “धर्मयुग” और रघुवीर सहाय के “दिनमान” में लिखते रहे। वे दैनिक इकनामिक टाइम्स, और पाक्षिक फिल्मफेयर में भी काम कर चुके हैं। विक्रम राव की समाचार रिपोर्ट की चर्चा विभिन्न विधान मण्डलों तथा संसद के दोनों सदनों में होती रही हैं।

मुरादाबाद, अहमदाबाद और हैदराबाद के साम्प्रदायिक दंगों पर उनकी रिपोर्ट अपनी वास्तविकता और सत्यता के लिए प्रशंसित हुई।बुन्देलखण्ड और उत्तर गुजरात में अकाल स्थिति पर भेजी उनकी रिपोर्टों से सरकारी और स्वयंसेवी संगठनों ने तात्कालिक मदद भेजी जिससे कई प्राण बचाए जा सके।

विक्रम राव की मातृभाषा तेलुगु है। वे मराठी, गुजराती तथा उर्दू भी जानते हैं। उन्होंने मीडिया पर नौ और डॉ. लोहिया पर दो पुस्तकें लिखी हैं। वे भारतीय प्रेस काउंसिल (PCI) के छह वर्षों (1991) तक लगातार सदस्य रहे।

श्रमजीवी पत्रकारों के लिए भारत सरकार द्वारा 2008 में गठित जस्टिस जी.आर. मजीठिया और मणिसाणा वेतन बोर्ड (1996) के वे सदस्य थे। प्रेस सूचना ब्यूरो की केन्द्रीय प्रेस मान्यता समिति के पाँच वर्षों तक वो सदस्य रहे।

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