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मुनाफा ही मुनाफा : भारत बना नारियल उत्पादन व उत्पादकता में अग्रणी देश

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नारियल की खेती किसानों के लिए लगातार मुनाफे का सौदा बन रही है। नारियल उत्पादन व उत्पादकता में भारत, विश्व का अग्रणी देश बन गया है। पिछले चार वर्षों में करीब 3,558 हेक्टेयर क्षेत्र में नए बागान लगाए गए। इसी के साथ प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 1,394 फलों हो गई है।

भारत अब मलेशिया, इंडोनेशिया एवं श्रीलंका को नारियल तेल का निर्यात करने लगा है, इसके साथ ही भारत पहली बार अमेरिका और यूरोपीय देशों को बड़ी संख्‍या में शुष्क नारियल का निर्यात कर रहा है। देश में नारियल का उत्पादन 19 राज्यों में किया जाता है। नारियल का सबसे ज्यादा उत्पादन केरल में होता है।

भारत मार्च 2017 तक नारियल तेल का आयात करता था, अब भारत अप्रैल 2017 से मलेशिया, इंडोनेशिया और श्रीलंका को नारियल तेल का निर्यात करने लगा है, इसके साथ ही भारत पहली बार अमेरिका और यूरोपीय देशों को बड़ी संख्‍या में शुष्क नारियल का निर्यात कर रहा है।

वर्ष 2010-14 के 9,561 हेक्टेयर की तुलना में वर्ष 2014-18 में 13,117 हेक्टेयर क्षेत्र को नए बागान के अंतर्गत लाया गया।

नारियल के उत्पादन में बढ़ोतरी की बदौलत भारत अप्रैल 2017 से ही मलेशिया, इंडोनेशिया और श्रीलंका को नारियल तेल का निर्यात करने लगा है, जबकि मार्च 2017 तक भारत नारियल तेल का आयात करता था। इसके साथ ही भारत पहली बार अमेरिका और यूरोपीय देशों को बड़ी संख्‍या में शुष्क नारियल का निर्यात भी कर रहा है। वर्ष 2017-18 के दौरान 1602.38 करोड़ रुपए मूल्‍य के नारियल का निर्यात किया गया, जबकि आयात केवल 259.70 करोड़ रुपए का हुआ था।

देश ने वर्ष 2014-18 के बीच नारियल की खेती में काफी प्रगति की है, और अब यह नारियल के उत्पादन और उत्पादकता में विश्व में अग्रणी देश बन गया है। वर्ष 2013-14 में प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 10122 फलों की थी जो वर्ष 2017-18 में बढ़कर 11516 फलों तक पहुंच गई। वर्ष 2010-14 के 9,561 हेक्टेयर की तुलना में वर्ष 2014-18 में 13,117 हेक्टेयर क्षेत्र को नए बागान के अंतर्गत लाया गया।

वैज्ञानिक नारियल खेती विधियों के किसान सहभागिता निर्देशन के अंतर्गत विभिन्न नारियल उत्पादक राज्यों में पिछले चार वर्षों में 62403 हेक्टेयर लाया गया, जो वर्ष 2010-14 तक 36477 हेक्टेयर था। उल्लेखनीय है कि नये क्षेत्रों में नारियल खेती का फैलाव हुआ है। वर्ष 2014-18 तक विभिन्न राज्यों में नारियल खेती के अधीन 13117 हेक्टेयर का नया क्षेत्र लाया गया, जो वर्ष 2010-14 तक कुल 9561 हेक्टेयर था।

पिछले चार वर्षों (2014-18) में 5115 नारियल उत्पादक समितियां, 430 नारियल उत्पादक फेडरेशन और 67 नारियल उत्पादक कंपनियां गठित की गईं, जबकि वर्ष 2004-14 के दौरान यह संख्‍या क्रमश: 4467, 305 और 15 थी।

नारियल उत्पादों के निर्यात से अर्जित आय वर्ष 2014-18 के दौरान 6448 करोड़ रुपए आंकी गई है जो वर्ष 2004-2014 तक 3975 करोड़ रुपए थी।

कौशल विकास कार्यक्रम ‘फ्रेंड्स ऑफ कोकोनट ट्री’ के अंतर्गत 33228 बेरोजगार युवकों को प्रशिक्षण दिलाया गया, जबकि वर्ष 2004-14 तक यह संख्‍या 27770 थी।

नारियल आधारित विभिन्न उत्पाद जैसे नारियल चिप्स, नारियल दूध, नारियल शक्कर, नारियल नीरा, डाब, नारियल शहद नारियल गुड़, नारियल दूध शेक, नारियल स्नैक्स विर्जिन नारियल तेल, नारियल नेचुरल क्रीम, नीरा कुकीज समेत अन्य उत्पादों के बनाने में काफी लोगों को रोजगार मिला।

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Budget : मोदी सरकार किसानों के खाते में हर साल जमा करेगी 6000 रुपए, गो सेवा का भी मिलेगा पैसा

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वित्त मंत्री पीयूष गोयल सरकार के वर्तमान कार्यकाल का आखिरी बजट पेश कर रहे हैं। यह एक अंतरिम बजट है। बजट में पीयूष गोयल ने कई अहम घोषणाएं की हैं। इन योजनाओं में किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी भी सुनने को मिली।

बजट पेश करने के दौरान वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने  कहा, ” प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत छोटे किसान जिनके पास 2 हेक्टेयर जमीन है, उनके बैंक खाते में सीधे 6000 रुपए सालाना देने का निर्णय किया है।” 

उन्होंने आगे कहा कि ये राशि 3 किश्तों में 2,000 रुपए कर के किसानों के बैंक खाते में सीधे डाली जाएंगी। इस सुविधा से 12 करोड़ किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। पहली किश्त बहुत जल्द भेजी जाएगी। ये योजना एक दिसंबर 2018 से लागू हो गई है। 

पीयूष गोयल ने कहा  कि गायों के लिए ‘राष्ट्रीय कामधेनु योजना’ को मंजूरी, छोटे किसानों को 500 रुपए दिए जाएंगे। गौ माता के लिए सरकार कभी पीछे नहीं हटेगी, जो जरूरत होगी वो प्रावधान करेगी। 

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