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छात्रों को बेरहमी से पीटे जाने का वीडियो वायरल, प्रिंसिपल गिरफ्तार

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बलूचिस्तान। पाकिस्तान में बलूचिस्तान प्रांत में दिल को झकझोर कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां के मास्तुंग में एक कैडेट कॉलेज के छात्रों को बेरहमी से पीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद आरोपित प्रिंसिपल को गिरफ्तार किया गया है।

आतंकवाद रोधी विभाग (सीटीडी) के डीआईजी एतजाज गोराया ने बलूचिस्तान हाईकोर्ट की पीठ को बताया गया कि प्रिंसिपल जावेद इकबाल बंगश को गिरफ्तार किया गया है।

हाईकोर्ट ने वीडियो पर संज्ञान लेने के बाद प्रिंसिपल को तुरंत गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। वीडियो में लाल रंग की वर्दी पहने छात्रों को कॉलेज के मैदान में कुछ लोगों के डंडों से बेरहमी से पिटते देखा जा सकता है। वीडियो में कुछ छात्र दर्द से कराहते और पिटाई से बचने की कोशिश कर रहे है।

कहा जा रहा है कि प्रिंसिपल के आदेश पर नौ मई को यह घटना हुई है। एक याचिका दाखिल होने के बाद कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की। गोराया ने बताया कि इस घटना में शामिल अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। सभी छात्रों की डॉक्‍टरी जांच कराई है।

कोर्ट ने सभी आरोपितों को गिरफ्तार करने और इस केस में रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। एक अन्य पुलिस अफसर ने बताया कि एक छात्र ने गुपचुप तरीके से घटना का वीडियो बनाकर बाद में इसे वायरल कर दिया गया। अफसर ने बताया कि प्रिंसिपल ने सजा देने के लिए पूर्व छात्रों को बुलाया था। उन्होंने बताया कि बंगश के बेटे को एक छात्र ने थप्पड़ मार दिया था। इसके बाद छात्रों को यह सजा दी गई।

 

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इस देश के डॉक्टरों ने किया बड़ा दावा, अब कमजोर पड़ने लगा है कोरोना वायरस

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस दुनियाभर के लगभग 62 लाख लोगों को अपना शिकार बना चुका है। इस खतरनाक बीमारी से मरने वालों की संख्या 3 लाख 71 हजार के पार चली गई है।

इस बीच इटली के टॉप डॉक्टर्स ने कोरोना को लेकर एक अच्छी खबर दी है। इस देश के डॉक्टर्स के दावे के मुताबिक  वायरस धीरे-धीरे अपनी क्षमता खो रहा है और अब उतना जानलेवा नहीं रह गया है।

डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना वायरस अब कमजोर पड़ रहा है। जेनोआ के सैन मार्टिनो अस्पताल में संक्रामक रोग प्रमुख डॉक्टर मैट्टेओ बासेट्टी ने ये जानकारी न्यूज एजेंसी ANSA को दी।

डॉक्टर मैट्टेओ ने कहा, कोरोना वायरस अब कमजोर हो रहा है. इस वायरस में अब वैसी क्षमता नहीं रह गई है जैसी दो महीने पहले थी। स्पष्ट रूप से इस समय की COVID-19 बीमारी अलग है।’

लोम्बार्डी के सैन राफेल अस्पताल के प्रमुख अल्बर्टो जांग्रिलो ने RAI टीवी को बताया,  ‘वास्तव में, वायरस क्लीनिकली रूप से अब इटली में मौजूद नहीं है। पिछले 10 दिनों में लिए गए स्वैब सैंपल से पता चलता है कि एक या दो महीने पहले की तुलना में अब इनमें वायरल लोड की मात्रा बहुत कम है।’

इटली में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक है और COVID-19 से होने वाली सबसे ज्यादा मौतों में इटली तीसरे नंबर पर है। हालांकि मई महीने में यहां संक्रमण के नए मामलों और मौतों में तेजी से गिरावट आई है और यहां कई जगहों पर सख्त लॉकडाउन को खोला जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय की एक मंत्री सैंड्रा जम्पा ने एक बयान में कहा, ‘कोरोना वायरस खत्म होने वाली बातों के लिए लंबित पड़े वैज्ञानिक प्रमाणों का सहारा लिया जा रहा है। मैं उन लोगों से कहती हूं कि इटली के लोगों को भ्रमित ना करें।’

सैंड्रा जम्पा ने कहा, ‘इसके बजाय हमें लोगों से अधिक सावधानी बरतने, फिजिकल डिस्टेंसिंग बनाए रखने, भीड़ में ना जानें, बार-बार हाथ धोने और मास्क पहनने के लिए कहना चाहिए।’

 

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