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हरभजन के घर के दरवाजे पर चिपकाया गया समन, देने पड़ सकते हैं 97 करोड़

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नई दिल्ली। जेट एयरवेज के पूर्व पायलट द्वारा दायर मानहानि मामले में क्रिकेटर हरभजन सिंह के खिलाफ बांबे हाईकोर्ट ने समन जारी किया है। चंडीगढ़ सेक्टर 9 में स्थित भज्जी की कोठी खाली होने पर समन गेट पर चस्पा कर दिया गया है।

गौरतलब है कि जेट एयरवेज के पूर्व कैप्टन बर्नड केन हॉसलिन ने 13 दिसंबर 2017 को भज्जी के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया था। उन्होंने शिकायत में 15 मिलियन यूएस डॉलर का दावा ठोका था, जो कि भारतीय राशि में करीब 97 करोड़ और 50 लाख रुपये है। साथ ही देरी के लिए दावे की रकम पर 18 प्रतिशत ब्याज देने की गुजारिश भी की है।

दरअसल हरभजन और साथियों की कथित ‘गलत शिकायत’ पर पायलट की नौकरी चली गई। पायलट को कथित तौर पर नस्ली टिप्पणी करने को लेकर बर्खास्त कर दिया गया था। पायलट के वकील ने कहा कि उन्होंने कथित गलत शिकायत पर अनुबंध समाप्त करने के लिए विमानन कंपनी को भी एक नोटिस भेजा था। भज्जी ने आरोप लगाया था कि पायलट बर्नड केन हॉसलिन ने दो महीना पहले एक घरेलू उड़ान के दौरान एक महिला यात्री के साथ बदसलूकी की और एक अन्य यात्री पर नस्ली टिप्पणी की थी।

वहीं अपनी याचिका में बर्नड केन हॉसलिन ने कहा है कि हरभजन सिंह व अन्य ने सोशल मीडिया पर उस पर नस्लीय टिप्पणियां करने के जो आरोप लगाए थे, उससे उनके करियर पर असर पड़ा है और उनकी मानहानि हुई है।

नोटिस में हरभजन सिंह और दो अन्य को 12 जून, 2018 को कोर्ट में पेश होकर अपना पक्ष रखने को कहा है। यह भी कहा गया है कि अगर निर्धारित तारीख पर हरभजन व अन्य या उनका वकील अदालत में पेश होकर अपना पक्ष नहीं रखते तो कोर्ट तीनों के खिलाफ एकतरफा फैसला सुना सकती है।

इस मामले में भेजे गए नोटिस को जालंधर स्थित हरभजन सिंह के आवास पर रिसीव कर लिया गया है। वहीं चंडीगढ़ आवास पर नोटिस रिसीव न होने के कारण कोर्ट के आदेश पर उनके आवास के बाहर चस्पा कर दिया गया है।

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CBI जाँच क्यों नहीं, UP में हजारों करोड़ का सरकारी धन डकार गए फर्जी शिक्षक

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देश में शिक्षकों की नियुक्ति में सबसे बड़े घोटाले का खुलासा यूपी में हुआ है। बीते वर्षों में बेसिक शिक्षा विभाग में हजारों शिक्षकों ने फर्जी दस्तावेजों से सरकारी नौकरी न सिर्फ हथियाई बल्कि हजारों करोड़ का वेतन भी हजम कर डाला है। यूपी में एसआईटी और एसटीएफ की शुरूआती जांच में जो खुलासे हो रहे हैं उससे हर कोई दंग है। कार्रवाई के नाम पर बड़े अफसर सिर्फ एफआईआर और वेतन वसूली दिखाकर अपनी गर्दन बचाने की जुगत में हैं। हकीकत यही है प्रदेश में शिक्षा विभाग को माफिया के हाथों पिछली सरकारों में मानो गिरवी ही रख दिया गया। सवाल ये भी है आखिर जिन अफसरों-नेताओं-मंत्रियों के सिंडिकेट ने यूपी के शिक्षा महकमे ने अरबों की रिश्वत लेकर बीते एक दशक के दौरान हजारों फर्जी नियुक्तियां की हैं वो कब जेल की सलाखों के पीछे जायेंगे। सबसे बड़ा सच ये भी है कि इन भ्रष्टों के रिश्तेदारों को भी सरकारी शिक्षकों की नौकरियां रेवड़ियों की तरह बांटी गयी हैं।
यूपी में आगरा के भीमराव अम्बेडकर विश्विद्यालय से जारी 2823 शिक्षकों की डिग्री फर्जी पाई गयी है

up fake degree scam

जिन्होंने बेसिक शिक्षा महकमे के अधीन परिषदीय स्कूलों में नियुक्ति पाई थी। भर्तियां वर्ष 2004-2005 से लेकर वर्ष 2016 तक पूरे प्रदेश में की गयी है। फिलहाल 930 शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है 497 शिक्षकों पर विभाग ने कार्रवाई का डंडा चलाया है वहीं 1427 शिक्षकों से वेतन वसूली की तयारी है लेकिन बेसिक शिक्षा महकमे के आंकड़ों में बड़ा झोल भी है। दरअसल आगरा के भीमराव आबेडकर विश्विद्यालय से डिग्री लिए एक हजार से ज्यादा शिक्षक अपने दस्तावेजों को असली बता रहे हैं डिग्रियां वाकई असली हैं या नकली। इसकी रिपोर्ट सरकार जारी करने से क्यों हिचक रही है
एसआईटी जांच में हुए इस हैरतअंगेज खुलासे के बाद अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने फर्जी शिक्षकों से वसूली करने व एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जिलों को जारी किये हैं हर शिक्षक से औसतन 60 लाख की वेतन वसूली होना तय है। करीब नौ सौ करोड़ की बड़ी सरकारी रकम इन फर्जी शिक्षकों से वसूली जायेगी।

जल्द ही प्रदेश के अफसर अपनी रिपोर्ट शासन को सौपेंगे। एसआईटी के पास शिक्षा महकमे के घोटालों की कई और जांचें भी हैं दरअसल डिजिटल तकनीक से यूपी के शिक्षा महकमे में रोजाना नए घोटालों का खुलासा हो रहा है परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों का डाटा मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा एप पर अपलोड कराने के बाद फर्जीवाड़ों के नए किस्से सामने आये। पूरा खेल 2008 से 2019 के बीच अंजाम दिया गया है मानव संपदा पोर्टल पर 15 जुलाई तक डाटा सत्यापित होने के बाद करीब 5 हजार से ज्यादा शिक्षकों के दस्तावेजों में गड़बड़ियां आना तय माना जा रहा है एसआईटी के अलावा एसटीएफ ने भी सीएम योगी के आदेश पर यूपी में हजारों शिक्षकों के दस्तावेजों में धांधलियों की जांच शुरू की है। हजारों शिक्षकों ने नियुक्ति के समय जो पैन नंबर दिया था वह उसी नाम के किसी अन्य शिक्षक के नाम पर दर्ज था।

दरअसल शिक्षकों के द्वारा पैन नम्बर बदले जाने की जानकारी जैसे ही शासन को मिली। सभी अफसरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। सैकड़ों ऐसे मामले भी सामने आएं, जिनमें कई शिक्षकों का वेतन एक ही बैंक खाते में जा रहा था। बस फिर क्या था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घोटाले की जानकारी होते ही बेसिक शिक्षा विभाग के फर्जीवाड़े की जांच एसटीएफ को सौप दी गयी।
यूपी के शिक्षा महकमे के खेल बड़े निराले हैं हाल ही में अनामिका शुक्ला प्रकरण सामने आया था। जिसमे खुलासा हुआ कि अनामिका खुद तो बेरोजगार थी लेकिन उसके शैक्षिक दस्तावेजों पर 25 जिलों के कस्तूरबा स्कूलों में फर्जी शिक्षिकाएं नौकरी कर रही थी। एसटीएफ की जांच आगे बढ़ी तो शिक्षा माफिया के खेल का पर्दाफाश हो गया। खुद बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश दिवेदी ने भी इस गंभीर मामले पर सफाई पेश की थी।
योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा महकमे में फर्जीवाड़ों को देखने के बाद माध्यमिक और उच्च शिक्षा में भी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया शुरू की है इस सिलसिले में डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने हाल ही में सरकार की और से अपना पक्ष रखते हुए शिक्षा माफिया पर सख्ती की बात भी कही है लेकिन इस तरह के फर्जीवाड़ों से एक बात जरूर निकल कर सामने आ रही है आखिर क्यों उत्तरप्रदेश में शिक्षा विभाग को भिक्षा विभाग कहा जाता है

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