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देश के 91 प्रमुख जलाशयों के जलस्तर में दो फीसद की कमी आई

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देश के 91 प्रमुख जलाशयों में (12 अप्रैल, 2018 को समाप्त सप्ताह) के दौरान 40.857 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 25 प्रतिशत है। यह 5 अप्रैल, 2018 को समाप्‍त समाप्‍त में 27 प्रतिशत पर था। पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 84 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 90 प्रतिशत है।

12 अप्रैल, 2018 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 40.857 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 25 प्रतिशत है। यह 5 अप्रैल, 2018 को समाप्‍त समाप्‍त में 27 प्रतिशत पर था। 12 अप्रैल, 2018 को समाप्त हुए सप्ताह के अंत में यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 84 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 90 प्रतिशत है।

इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 161.993 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 257.812 बीसीएम का लगभग 63 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं।

उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 3.62 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 20 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 23 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 27 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है, तथा साथ ही पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।

पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 7.83 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 42 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 49 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 36 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कमतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से बेहतर है।

पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 31.26 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 8.69 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 28 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 34 प्रतिशत था। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 32 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कमतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है ।

मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 12.31 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 29 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 43 प्रतिशत था। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 30 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कमतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है।

दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना (टीजी), एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 8.41 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 16 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 12 प्रतिशत था। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 22 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से बेहतर है, और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है।

पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें राजस्थान, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बराबर है उनमें हिमाचल प्रदेश शामिल है। इसी अवधि के लिए पिछले वर्ष की तुलना में कम संग्रहण करने वाले राज्यों में पंजाब, झारखंड, ओडिशा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना शामिल हैं।

 

मनोरंजन

‘बच्चन पांडे’ में अक्षय कुमार के साथ ये हीरोइन आएंगी नजर

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मुंबई। बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार की अपकमिंग फिल्म ‘बच्चन पांडे’  को लेकर नई अप्डेट सामने आई है। फिल्म में अक्षय के ऑपोजिट कृति सेनन नजर आएंगी।

फिल्म 2020 में रिलीज होगी। प्रोडक्शन कंपनी नाडियाडवाला ग्रैंडसन के आधिकारिक अकाउंट से की गई ट्वीट के अनुसार, “हमें यह घोषणा करते हुए काफी खुशी हो रही है कि कृति सेनन हमारे क्रिसमस को बेहतर बनाने वाली हैं। हैशटैग एनजीइएफ परिवार में ‘बच्चन पांडे’ के साथ आपका एक बार फिर से स्वागत है।”

कृति ने इस बारे में कहा कि वह अक्षय और निर्देशक फरहाद समजी, जिनके साथ उन्होंने ‘हाउसफुल 4’ में काम किया उनके साथ फिर से काम करने को लेकर काफी उत्साहित हैं।

अभिनेत्री ने कहा, “इस रीयूनियन के लिए उत्साहित और रोमांचित हूं! यह क्रिसमस वास्तव में शानदार होने वाला है! हैशटैग बच्चन पांडे में काम शुरु करने को लेकर इंतजार नहीं कर पा रही हूं।”

फिल्म की अन्य जानकारियों को अभी उजागर नहीं किया गया है। ‘बच्चन पांडेय’ अक्षय और नाडियाडवाला की एक साथ दसवीं फिल्म है।

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