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भगवान शिव के रूप में इमरान खान, पाकिस्तान में मचा तांडव

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान में तहरीक-ए इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व क्रिकेटर इमरान खान को लेकर खासा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर इमरान खान भगवान शिव के रूप में नजर आ रहे हैं। इसका लोगों ने जमकर विरोध किया है। पाकिस्तान के हिंदुओं ने इसे भावनाओं से खिलवाड़ बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।

बुधवार को पाकिस्तानी संसद की कार्यवाही के दौरान प्रमुख विपक्षी पार्टी पीपीपी (पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी) के एक सदस्य रमेश लाल ने कहा कि सत्ताधारी मुस्लिम लीग (नवाज) के कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर इमरान की एक तस्वीर पोस्ट की है जिसमें उन्हें हिंदुओं के देवता शिव के रूप में दिखाया गया है। दरअसल, यह तस्वीर एक फेसबुक पेज पर शेयर की गई है, जो नवाज शरीफ की पार्टी का समर्थन करता है। यह तस्वीर 8 अप्रैल को पोस्ट की गई थी।

संसद अध्यक्ष ने यह विवाद सामने आने के बाद केस की जांच एफआईए के साइबर सेल को भिजवा दी। गृह मंत्री से मामले की रिपोर्ट जल्द से जल्द संसद में पेश करने के आदेश दिए हैं।


सोशल मीडिया पर हिंदुओं ने इस मामले की जमकर आलोचना की। पेशावर निवासी केदारनाथ ने ट्वीट कर इस घटना पर एतराज जताया। उन्होंने कहा, ‘अगर हम पाकिस्तान में समान नागरिक हैं तो यह क्या है? यह इस्लाम में तो नहीं है। हम इसके खिलाफ ऐक्शन चाहते हैं। हम पाकिस्तानी हैं लेकिन सबसे पहले हम हिंदू हैं। इस फेसबुक फेज के खिलाफ ऐक्शन लिया जाना चाहिए।’

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करतारपुर पर पाक सेना ने पलटा इमरान खान का फैसला, चली ये चाल

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नई दिल्ली। करतारपुर कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान का दोहरा चरित्र एक बार फिर सामने आया है। पाकिस्तानी सेना ने पाक पीएम इमरान खान के उस फैसले को बदल दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय श्रद्धालुओं को पवित्र गुरुद्वारा दरबार साहिब आने के लिए महज एक वैध पहचान-पत्र की जरूरत होगी। पाक सेना ने प्रवक्ता आसिफ गफूर ने कहा कि अब सिख तीर्थयात्रियों को करतारपुर कॉरिडोर का प्रयोग करने के लिए भारतीय पासपोर्ट की आवश्यक्ता होगी।

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर की इस टिप्पणी से एक दिन पहले ही भारत ने पाकिस्तान से यह स्पष्ट करने को कहा था कि करतारपुर स्थित गलियारा जाने के लिए सिख श्रद्धालुओं को पासपोर्ट की जरूरत होगी या नहीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मेजर जनरल गफूर ने बुधवार को कहा कि भारतीय सिख श्रद्धालुओं को करतारपुर गलियारे का प्रयोग करने के लिए पासपोर्ट दिखाना जरूरी होगा।

गफूर ने कहा कि सुरक्षा कारणों से, प्रवेश पासपोर्ट आधारित पहचान पर मिली अनुमति के तहत कानूनी तरीके से दिया जाएगा। एक नवंबर को, प्रधानमंत्री खान ने करतापुर गलियारे का निर्माण पूरा होने की ट्विटर पर घोषणा करते हुए कहा था कि उन्होंने दो शर्तों को माफ कर दिया है। इनमें से एक पासपोर्ट से जुड़ी शर्त थी जबकि दूसरी शर्त भारत से करतारपुर तीर्थयात्रा पर आने वाले सिखों द्वारा 10 दिन पहले पंजीकरण कराने से जुड़ी थी।

उन्होंने कहा था कि भारत के सिख श्रद्धालुओं को करतारपुर आने के लिए पासपोर्ट की नहीं बल्कि एक वैध पहचान-पत्र की जरूरत होगी। इसके अलावा उद्घाटन समारोह के लिए आने वाले और 12 नवंबर को सिख गुरु की 550वीं जयंती के मौके पर आने वाले श्रद्धालुओं से 20 डॉलर का सेवा शुल्क भी नहीं वसूला जाएगा।

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