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आईआरएनएसएस-1आई का इसरो ने किया सफल प्रक्षेपण, जानिए इसकी खूबियां

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने गुरुवार तड़के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1आई को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया।

इस प्रक्षेपण के सफल होने के बाद इसरो के अध्यक्ष के.सिवन ने कहा, मुझे यह बताते हुए अत्यंत खुशी हो रही है कि पीएसएलवी ने नौवहन उपग्रह को सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में स्थापित कर दिया है। सिवन ने कहा कि अगले आठ वर्षो में इसरो ने मून मिशन सहित नौ मिशनों की योजना बनाई है।

  1. इस 1,425 किलोग्राम वजनी उपग्रह को पीएसएलवी-सी41 रॉकेट अंतरिक्ष में लेकर गया।
  2. यह स्वदेशी तकनीक से तैयार नौवहन उपग्रह है।
  3. यह प्रक्षेपण गुरुवार तड़के 4.04 बजे हुआ।
  4. इस नौवहन उपग्रह की लंबाई 44.4 मीटर और वजन 321 टन है।
  5. इस उपग्रह को प्रक्षेपण के 19 मिनट के भीतर ही कक्षा में स्थापित कर दिया गया। इसे 1,420 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। आईआरएनएसएस-1आई से नौवहन के क्षेत्र में खासी मदद मिलेगी। इससे समुद्री नौवहन के साथ सेना को भी मदद मिलेगी। यह उपग्रह इसरो की नाविक प्रणाली का हिस्सा होगा।

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मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन बोले-बाबर ने बनवाया था मंदिर

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नई दिल्ली। अयोध्या जमीन विवाद मामले की सुनावाई के 28वें दिन मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने अदालत में बाबरनामा का हवाला दिया।

राजीव ने कहा कि वहां मंदिर ही बाबर ने बनाया था। उन्होंने कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि हिन्दू पक्षकार तो गजेटियर का हवाला अपनी सुविधा के मुताबिक दे रहे हैं, लेकिन गजेटियर कई अलग अलग समय पर अलग नजरिये से जारी हुए थे। लिहाजा सीधे तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि बाबर ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई।

राजीव धवन ने कहा कि जस्टिस अग्रवाल के इस विचार से भी इत्तेफाक नहीं रखता, जो कहीं रिपोर्ट को मान रहे हैं और कहीं नहीं। इस पर जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि कई पुरानी मस्जिदों में संस्कृत में भी कुछ लिखा हुआ मिला है। वो कैसे?

जज के सवाल का जवाब देते हुए राजीव धवन ने कहा कि क्योंकि बनाने वाले मजदूर कारीगर हिंदू होते थे तो वे अपने तरीके से इमारत बनाते थे।

बनाने का काम शुरू करने से पहले वो विश्वकर्मा और अन्य तरह की पूजा भी करते थे और काम पूरा होने के बाद यादगार के तौर पर कुछ लेख भी अंकित करते थे।

 

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