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जानिए किन बीमारियों की गिरफ्त में फंस रहे हैं भारतीय

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पिछले कुछ वर्षों में हमारे देश में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का प्रभाव बढ़ा है। साथ ही डायबिटीज, हृदय रोग, क्षय रोग, मोटापा, तनाव की चपेट में भी लोग बड़ी संख्या में आ रहे हैं। ये बीमारियां बड़ी तादाद में उनकी मौत का कारण बन रही हैं।
ग्रामीण तबके में देश की अधिकतर आबादी उचित खानपान के अभाव में कुपोषण की शिकार है। महिलाओं, बच्चों में कुपोषण का स्तर अधिक देखा गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार प्रति 10 में से सात बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं। वहीं, महिलाओं की 36 प्रतिशत आबादी कुपोषण की शिकार है।

कैंसर

देश में मुंह और गले के कैंसर रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। आलम यह है कि हर वर्ष मुंह और गले के कैंसर से पीड़ित 10 लाख रोगी सामने आ रहे हैं, जिनमें से आधे से अधिक मरीजों की मौत बीमारी की पहचान होने तक हो जाती है। वायस ऑफ टोबैको विक्टिमस (वीओटीवी) ने एशियन पेसिफिक जनरल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन द्वारा जारी रिपोर्ट के आधार पर यह खुलासा किया है। करीब 30 साल पहले तक 60 से 70 साल की उम्र में मुंह और गले का कैंसर होता था, लेकिन अब यह उम्र कम होकर 30 से 50 साल तक पहुंच गई है। मुंह के कैंसर के रोगियों की सर्वाधिक संख्या भारत में है।

हर वर्ष मुंह और गले के कैंसर से पीड़ित 10 लाख रोगी सामने आ रहे हैं

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) द्वारा वर्ष 2008 में प्रकाशित अनुमान के मुताबिक, भारत में सिर व गले के कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है. इन मामलों में 90 फीसदी कैंसर तंबाकू, शराब व सुपारी के सेवन से होते हैं और इस प्रकार के कैंसर की रोकथाम की जा सकती है।
एशियन पेसिफिक जर्नल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन द्वारा 2008 व 2016 में प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार, 2001 में पुरुषों में मुंह का कैंसर के मामले 42,725 वहीं 2016 में 65,205 थे, वहीं महिलाओं में 22,080 व 35,088 मामले सामने आए। गले और सांस नली के कैंसर के मामले 2008 व 2016 में पुरुषों में 49,331 और 75,901 जबकि महिलाओं में 9251 तथा 14550 हो गया है।

डायबिटीज

भारत में पिछले पाच वर्षों के दौरान मधुमेह पीड़ितों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

भारत में पिछले पाच वर्षों के दौरान मधुमेह पीड़ितों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। जह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 21 जुलाई 2017 को लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी थी।
उन्होंने बताया था कि अंतराष्ट्रीय मधुमेह संघ (आईडीएफ) के मुताबिक भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या वर्ष 2011, 2013 और 2015 में क्रमश 61.3 मिलियन, 65.1 मिलियन और 69.2 मिलियन थी।

हृदय रोग

आंकड़े बताते हैं कि भारत में हृदय संबंधी बीमारियां अत्यधिक बढ़ती जा रही हैं।

ग्लोबल बोर्ड ऑफ डिजीज (जी.बी.डी.) 2015 के अध्ययन के मुताबिक देश में हृदय रोग के कारण मौत की दर 1,00,000 आबादी में 272 थी। आंकड़े बताते हैं कि भारत में हृदय संबंधी बीमारियां अत्यधिक बढ़ती जा रही हैं।

मोटापा

दुनियाभर में हर साल 20 लाख मोटापे से ग्रस्त लोग अपनी जान खो बैठते है।

दुनिया भर में मोटापा एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। यह न सिर्फ वयस्कों में बल्कि बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा है। WHO के अनुसार दुनियाभर में 4.2 करोड़ पांच साल के बच्चे मोटापे का शिकार हैं। बच्चों में मोटापे से उन्हें गंभीर रोग जैसे डायबिटीज और दिल संबंधी बीमारियों के होने का ख़तर कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है। दुनियाभर में हर साल 20 लाख मोटापे से ग्रस्त लोग अपनी जान खो बैठते है।
‘पीडियाट्रिक ओबेसिटी’ नामक एक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक भारत में साल 2025 तक मोटापे से पीड़ित बच्चों की संख्या 1.7 करोड़ पहुंच जाएगी। भारत मोटे बच्चों के मामले में दुनिया के 184 देशों की सूची में दूसरे स्थान पर आ जाएगा जो कि काफी चौका देने वाला है।

तनाव

भारत में डिप्रेशन एक बड़ी बीमारी के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। डिप्रेशन गंभीर रोगों और डिस्‍ऑर्डर के ख़तरों को बढ़ाने का काम करता है। इनमें आत्‍महत्‍या की प्रवृत्ति, डायबिटीज और दिल के रोग प्रमुख हैं, जिनकी वजह से दुनिया की ज्‍यादातर आबादी दम तोड़ देती है।

हर 20 लोगों में से एक व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार है।

मुरादाबाद के स्‍टेट केजीके होम्‍योपैथि‍क मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में मनोरोग विभाग के प्रमुख डॉ. एसएस यादव डिप्रेशन को जानलेवा बताते हैं। इस रोग से शरीर के प्रमुख अंग बुरी तरह प्रभावित होते हैं। डॉ. यादव के मुताबिक अस्‍पताल की ओपीडी में रोजाना चार–पांच मरीजों में डिप्रेशन के लक्षण मिल रहे हैं। उन्‍होंने बताया, “डिप्रेशन के मरीजों को सारी दुनिया बेकार लगती है, कुछ अच्‍छा नहीं लगता। लाइफ से सेटिसफाई नहीं रहते। कुछ में तो सुसाइडल बिहैवियर भी देखने को मिलता है। ज्‍यादा उम्‍मीदें पालने वाले लोगों के अरमान पूरे न होना भी डिप्रेशन की बड़ी वजह है।”
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस द्वारा 12 राज्यों में किए गए सर्वे के मुताबिक भारत में हर 20 लोगों में से एक व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार है। डब्‍ल्‍यूएचओ के अनुसार भारत दुनिया के सर्वाधिक डिप्रेस्‍ड देशों की सूची में शामिल है और लगभग 36 प्रतिशत आबादी ने इसका सामना किया है या कर रही है।

कुपोषण

भूखे लोगों की 23 फीसदी आबादी भारत में रहती है।

भारत में कुपोषण भी लगातार बढ़ता जा रहा है। भूमंडलीय भुखमरी पर यूएन की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि भूखे लोगों की 23 फीसदी आबादी भारत में रहती है। “स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रीशन इन द वर्ल्ड, 2017” की रिपोर्ट में बताया गया है कि कुपोषित लोगों की संख्या 2015 में करीब 78 करोड़ थी तो 2016 में यह बढ़कर साढ़े 81 करोड़ हो गयी है।

मनोरंजन

छपाक का बॉक्स ऑफिस पर बुरा हाल, शनिवार को इतना रहा कलेक्शन

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मुंबई। दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘छपाक’ का बॉक्स ऑफिस पर खराब प्रदर्शन जारी है। फिल्म ने शनिवार को 1 करोड़ की कमाई की। इसी के साथ फिल्म का कुल कलेक्शन 31 करोड़ हो गया है।

फिल्म को क्रिटिक्स ने तो सराहा है लेकिन फिल्म को लेकर दर्शकों में मिली जुली प्रतिक्रिया मिली है।  लोग फिल्म की तारीफ कर रहे हैं तो वहीं कुछ लोग कहानी को कमजोर बता रहे हैं।

दीपिका पादुकोण जैसी स्टार के लिए यह कलेक्शन काफी कम है। इससे पहले रिलीज हुई उनकी फिल्मों में से किसी ने भी इतना कम कलेक्शन नहीं किया था।

माना जा रहा है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दीपिका के जाने से  भी फिल्म को खासा नुकसान हुआ है। बता दें कि जेएनयू में जाने के बाद बॉयकॉट छपाक ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा था।

वहीं अजय देवगन की बड़े बजट की फिल्म तानाजी से क्लैश की वजह से भी फिल्म को काफी नुकसान पहुंचा है। अब देखना यह होगा कि 35 करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म अपनी लागत निकाल पाती है या फिर प्रोड्यूसर के तौर पर दीपिका की पारी फ्लॉप फिल्म के शुरू होती है।

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